ग्वांतानामो पर ओबामा का 'यू-टर्न'

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Image caption ग्वांतानामो में कई क़ैदियों के ख़िलाफ़ न मुकदमा चलाया गया और न ही उन्हें दोषी पाया गया

दो साल तक ग्वांतानामो बे में क़ैदियों के ख़िलाफ़ नए सैन्य मुकदमों को रोक कर रखने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इस नीति से पलट गए हैं और उन्होंने इस बारे में नई व्यवस्था की घोषणा की है.

जनवरी 2009 में राष्ट्रपति पद संभालने के दूसरे ही दिन ओबामा घोषणा की थी कि वे एक साल के भीतर ग्वांतानामो बे जेल को बंद करना चाहते हैं.

उस समय उन्होंने इस जेल को 'अल क़ायदा के लिए एक भर्ती केंद्र' की संज्ञा दी थी.

अब ग्वांतानामो बे की जेल में सैन्य अभियोग दोबारा शुरु होंगे.

'दर्दनाक यू-टर्न'

राष्ट्रपति ओबामा ने एक बयान में कहा है, "मैं कुछ नए क़दमों की घोषणा कर रहा हूँ. इनके तहत आतंकवादियों को न्याय के कटघरे तक ले जाने की हमारी क्षमता बढ़ेगी. इससे क़ैदियों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी...सैन्य आयोग सुनिश्चित करते हैं कि हमारी सुरक्षा और मूल्य मज़बूत हों."

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता ने कहा है कि ये घोषणा अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा का 'दर्दनाक यू-टर्न' यानी नीति में उलट-फेर है.

जनवरी 2009 से ग्वांतानामो में नए सैन्य आयोग निलंबित हैं. इनके तहत अमरीका पर ग्यारह सितंबर के हमलों और कई अन्य घटनाओं के प्रमुख संदिग्ध को क़ैदी बनाकर रखा गया है.

अमरीकी एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर का कहना था, "इस आदेश से उस क़ानूनी प्रक्रिया को बल मिलेगा जिसके तहत हम उन लोगों को क़ैद करके रख पाएँगे जो हमारे देश के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे हैं और जिनसे अमरीका की सुरक्षा का ख़ासा ख़तरा है."

राष्ट्रपति ने अपने पास ये अधिकार रखा है कि ग्वांतानामो बे के कुछ क़ैदियों के ख़िलाफ़ अमरीका की ज़मीन पर संघीय जेलों में मुकदमे चलाए जा सकें. इस क़दम का कई अमरीकी सांसदों ने लगातार विरोध किया है.

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