लीबिया:बीबीसी के पत्रकारों की पिटाई

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लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के सुरक्षा बलों ने बीबीसी के तीन पत्रकारों को हिरासत में रखा और उनकी पिटाई की है. वे ज़ाविया पहुँचने की कोशिश कर रहे थे जहाँ विद्रोहियों और सरकार समर्थक सेना के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है.

लीबियाई सेना और ख़ुफ़िया पुलिस ने तीनों पत्रकारों को मुक्के मारे, राइफ़िलों से पीटा और फिर नक़ाब पहनाकर उन्हें जान से मार देने का नाटक किया.

इन पत्रकारों को सोमवार को हिरासत में लिया गया था और फिर 21 घंटे उन्हें हिरासत में रखा गया. अब उन्हें हवाई जहाज़ के ज़रिए लीबिया से बाहर भेज दिया गया है.

पिछले चार दिनों से ज़ाविया में विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है. सेना ने वहाँ तोपों और टैंकों का इस्तेमाल किया है.

सुरक्षा प्राथमिकता है, रिपोर्टिंग जारी रहेगी: बीबीसी

सोमवार को सेना के एक नाके पर बीबीसी के पत्रकारों ने अपने पहचान पत्र फ़ौजियों को दिखाए.

उसके बाद उन्हें सैनिकों की छावनी में ले जाया गया. वहाँ उनकी आंखों पर पट्टी बाध दी गई, उनके हाथ बांध दिए गए और फिर उनकी पिटाई की गई.

इनमें से एक पत्रकार क्रिस कॉब स्मिथ का कहना था, "हमें एक दीवार के सामने खड़ा कर दिया गया और मैंने आम कपड़ों में एक व्यक्ति को हाथ मशीनगन उठाए देखा. उसने एक-एक कर सभी की गर्दन पर मशीनगन की नली रखी. जब मैंने उसकी ओर देखा तो वह मुझपर चीख़ा. वह मुझ तक आया, मेरी गर्दन पर मशीनगन की नली रखी और दो बार गोलियाँ चलाईं जो मेरे कान के पास से होते हुए गुज़र गईं. सैनिक हँसने लगे."

फ़लस्तीनी मूल के एक पत्रकार फैरास किलानी को तो बार-बार पीटा गया. सैनिकों का कहना था कि उन्हें विद्रोह के बारे में किलानी की रिपोर्टिंग पसंद नहीं है. किलानी पर जासूस होने का आरोप लगाया गया.

बीबीसी के कैमरामैन गोक्टे कोरालटान का कहना था कि उन्हें यक़ीन हो गया था कि वे वहाँ से ज़िंदा नहीं निकल पाएँगे.

बीबीसी की टीम ने ज़ाविया से लाए गए कुछ बंधक भी वहाँ देखे.

उनका कहना था, "मैं नहीं बता सकता कि स्थिति कितनी भयावह थी. वहाँ अधिकतर बंधकों को नक़ाब पहनाकर रखा गया था, उनके हाथ बंधे हुए थे और सूजे हुए थे और कई की पस्लियाँ टूटी हुई थीं. वे बहुत दर्द में थे और चीख़ रहे थे. इनमें से चार की हालत बहुत ख़राब थी. उनके चेहरे और शरीर पर उत्पीड़न के निशान थे. एक ने बताया कि उसकी कम से कम दो पस्लियाँ टूटी हुई हैं. मैंने छह घंटे तक उनकी मदद करने की कोशिश की. उन्हें पानी पीने, पेशाब करने और हिलने-जुलने में मदद की ज़रूरत थी."

लीबियाई सरकार के एक अधिकारी ने बाद में कहा कि बीबीसी की टीम के साथ हुए बर्ताव के लिए उन्हें अफ़सोस है.

लेकिन बीबीसी ने एक बयान में कहा है कि वह इस बर्ताव की कड़ी निंदा करता है.

बीबीसी ग्लोबल न्यूज़ की कंट्रोलर लिलियन लैंडर ने एक बयान में कहा, "हमारे पत्रकारों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, विशेष तौर पर तब जब वे इतनी मुश्किल परिस्थितियों में काम कर रहे हों. ये ज़रूरी है कि बीबीसी या फिर किसी भी मीडिया संस्था के पत्रकारों को लीबिया की स्थिति पर हमले के डर के बिना रिपोर्ट करने की अनुमति होनी चाहिए. इसके बावजूद बीबीसी ब्रिटेन और बाहर के श्रोताओं के लिए लीबिया में जो हो रहा है उस पर रिपोर्टिंग करता रहेगा."

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