लिट्टे का कोई शिविर नहीं: भारत

श्रीलंका
Image caption 2009 में लिट्टे की हार के बाद शायद ये पहली ख़बर है कि लिट्टे दोबारा संगठित होने की कोशिश कर रहे है.

भारत ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री डीएम जयरत्ने के उस बयान की कड़ी निंदा की है जिसमें उन्होने कहा था कि तमिलनाडु में तमिल छापामार संगठन लिट्टे के तीन शिविर चल रहे हैं.

इस बयान पर टिप्पणी करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि श्रीलंका को इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए.

विष्णु प्रकाश ने कहा, " श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के बयान को हमने देखा है, हम ऐसे किसी भी कैंप की मौज़ूदगी को सिरे से ख़ारिज करते हैं. श्रीलंका सरकार ने हमारे सामने ऐसा कोई मुद्दा हमारे सामने नहीं उठाया है. ये बयान दुर्भाग्यपूर्ण है.हम श्रीलंका सरकार से अनुरोध करते है कि वो इस तरह के बेबुनियाद आरोप ना लगाए."

भारत से छपने वाले दो अंग्रेज़ी अख़बारों 'द हिंदू' और 'द हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक़ श्रीलंकाई प्रधानमंत्री ने ये बातें बुधवार को श्रीलंकाई संसद में कहीं.

अख़बारों ने प्रधानमंत्री को यह कहते बताया है कि इन शिविरों में तमिल छापामारों को प्रशिक्षण दिया जाता है और इनमें से एक में तो ख़ास तौर पर सिर्फ़ महत्वपूर्ण लोगों की हत्या करने की ट्रेनिंग दी जाती है.

'तीन समूह'

श्रीलंका की समाचार एजेंसी लंकापुवथ के अनुसार लिट्टे ख़ुद को तीन अलग-अलग गुटों में दोबारा संगठित होने की कोशिश कर रहा है. तीन लोग इन तीन गुटों का नेतृत्व कर रहे हैं.

बुधवार को संसद में आपात काल की समय सीमा बढ़ाए जाने पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले गुट का नेतृत्व अमरीका में रहने वाले वी रूद्रकुमार कर रहे हैं, दूसरे का नॉर्वे स्थित टेडियावन कर रहे हैं जबकि तीसरे गुट का नेतृत्व भारत में रह रहे विनयगम कर रहे हैं.

2009 में लिट्टे के ख़िलाफ़ श्रीलंकाई सेना के ऑपरेशन के अंतिम चरण में विनयगम भारत भाग गए थे.

प्रधानमंत्री के अनुसार इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य श्रीलंका में हिंसा फैलाना है.

प्रधानमंत्री जयरत्ने ने कहा कि भारतीय राजनेताओं की हत्या और श्रीलंका में गृह युद्द कराने की साज़िश रची जा रही है.

'हत्या की साज़िश'

उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसी को तमिलनाडु में चल रहे तीन शिविरों की जानकारी मिली है. एक शिविर में तमिल छापामारों को ख़ास तौर पर राजनेताओं की हत्या करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. पुगलंद्र मास्टर नाम का एक आदमी इसकी देख रेख कर रहा है.

जयरत्ने ने बताया कि इसी समूह ने हाल ही में चेन्नई के महाबोधी ऑफ़िस पर हमला किया था.

श्रीलंका के एक अधिकारी के मुताबिक़ ख़ुफ़िया एजेंसी ने तमिलनाडु-केरल की सीमा पर पिचुमलाई गांव में शिविर चलने की सूचना दी थी.

लेकिन श्रीलंका में विपक्ष के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री के इस दावे पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि क्या सरकार ने भारत के सामने इस मुद्दे को उठाया है. प्रधानमंत्री या उनके मंत्रिमंडल के किसी भी सहयोगी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

प्रधानमंत्री के इस अनेपक्षित दावे पर कोलंबो में राजनयिकों की तरफ़ से बहुत सधी हुई प्रतिक्रिया आ रही है.

भारत के एक राजनयिक ने कहा कि श्रीलंका सरकार का ये आरोप बेबुनियाद है. उन्होंने कहा कि अगर आपातकाल को बढ़ाने के लिए शिविर की बात जानबूझकर कही गई है तो ये एक कमज़ोर दलील है.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ऐसा माना जाता है कि 1970 और 80 के दशक में भारत के कई इलाक़ो में तमिल छापामारों को प्रशिक्षण दिया जाता था लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद लिट्टे पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जो अब भी जारी है.

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