परमाणु तकनीक की तस्करी का मामला

  • 11 मार्च 2011
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Image caption परमाणु तकनीक से संबंधित सामान अमरीका से बाहर भेजने के लिए विशेष लाइसेंस की आवश्यक्ता होती है.

अमरीका में रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक के खिलाफ़ गैरकानूनी तौर पर अमरीका से परमाणु तकनीक पाकिस्तान भेजने के जुर्म में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं.

अमरीकी न्याय मंत्रालय ने मेरीलैंड राज्य के स्प्रिंग वैली शहर में रहने वाले नदीम अख़्तर पर आरोप लगाया है कि उसने वर्ष 2005 औऱ 2008 के बीच एक अन्य पाकिस्तानी व्यक्ति के साथ मिलकर परमाणु तकनीक से जुड़े कई सामानों और संयंत्रों की तस्करी कर पाकिस्तान भेजा.

यह दूसरा व्यक्ति अभी पाकिस्तान में है और अमरीकी अधिकारियों की हिरासत में नहीं है. आरोप पत्र के मुताबिक यह तकनीक पाकिस्तान के परमाणु संस्थानों के लिए भेजी गई.

इनमें परमाणु संबंधित रेडियोधर्मिता की जांच के उपकरण, परमाणु रिएक्टर में प्रयोग किया जाने वाले पानी को साफ़ करने के पदार्थ और उपकरण जैसे स्विच की तस्करी की.

विशेष लाईसेंस

यह सारा सामान अमरीका से बाहर किसी अन्य देश को भेजने के लिए विशेष लाइसेंस की आवश्यक्ता होती है. लेकिन नदीम अख़्तर ने बिना किसी लाइसेंस के इस सामान को पाकिस्तान भेजा.

पैतालीस वर्षीय अख्तर एक कम्प्यूटर कंपनी चलाते हैं और उन पर आरोप हैं कि इसी के ज़रिए उन्होंने परमाणु तकनीक संबंधी समान पाकिस्तान भेजा.

इस मामले में जिन अमरीकी कंपनियों से सामान लिया गया उनको दुबई और पाकिस्तान के बैंको से अमरीका के बैंकों में धन भी भिजवाया गया था.

अख्तर पर आरोप है कि उसने ऐसी पाकिस्तानी कंपनियों को यह सामान भेजा जो अमरीकी व्यापार विभाग की ओर से काली सूची में शामिल की गई हैं.

इस मामले पर अमरीकी सरकार के वकील रोड रोसेन्सटाइन ने कहा,''अमरीकी कानून परमाणु संस्थानों में प्रयोग किए जाने वाले सामानों को देश से बाहर भेजने पर कड़ी नज़र रखता है. इसके तहत यह बताना ज़रूरी है कि यह सामान किसको भेजा जा रहा है. लेकिन नदीम अख्तर ने इस कानून का उल्लंघन किया और ग़लतबयानी से काम लिया.''

कानून का उल्लंघन

आरोपपत्र के मुताबिक जिन पाकिस्तानी संस्थानों को यह सामान भेजे गए उनमें कादियान में स्थित चसमा परमाणु उर्जा प्लांट और अंतरिक्ष शोध की संस्था ‘स्पेस एंड अपर एटमॉस्फ़ियर रिसर्च कमिशन’ भी शामिल हैं. इन दोनों संस्थानों को सामान सप्लाई किए जाने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है.

वर्ष 2005 और 2008 के बीच अख्तर ने मैसेच्यूसेट्स और नॉर्थ टकोटा राज्यों में स्थित कंपनियों से कई परमाणु तकनीक संबंधित वर्जित उपकरण खरीद कर पाकिस्तान के चलमा प्लांट भिजवाए थे.

आरोपपत्र में कहा गया है कि इस प्रकार के परमाणु संबंधित सामान भेजते समय अखतर ने दस्तावेज़ों में इनके प्रयोग के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी भरी.

अप्रसार को लेकर चिंता

नदीम अख्तर को इस सारे काम के लिए भेजे जाने वाले हर सामान की क़ीमत के मुताबिक पांच से सात प्रतिशत का कमीशन मिलता था.

अमरीका, पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर कई दशकों से नज़र रखे हुए है और परमाणु तकनीक के अप्रसार को लेकर चिंतित भी रहता है.

अमरीकी जांच अधिकारियों का कहना है कि उनकी कोशिश होती है कि इस तरह की परमाणु तकनीक गैरकानूनी ढंग से पाकिस्तान तक न पहुंचने पाए.

अमरीकी व्यापार मंत्रालय के एरिक हर्शोन कहते हैं, ''यह गिरफ़्तारी कई जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने का नतीजा है. जिसके ज़रिए हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पाकिस्तान को भेजी जाने वाली गैरकानूनी परमाणु तकनीक को रोका जा सके.''

अगर नदीम अख्तर पर आरोप सिद्व हो जाते हैं तो उन्हे 20 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है

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