बहरीन पहुँचे सऊदी सैनिक

  • 14 मार्च 2011
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Image caption बहरीन में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं

बहरीन में कई सप्ताह से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए सउदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों ने अपने सैनिक वहाँ भेजे हैं.

बहरीन के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ही खाड़ी सहयोग परिषद के छह सदस्य देशों से सहायता माँगी थी.

बहरीन का विपक्ष अन्य देशों से सैनिकों के आने को देश पर 'विदेशी आधिपत्य' बता रहा है.

बहरीन के बहुसंख्यक शिया लंबे समय से ये शिकायत करते रहे हैं कि वो सुन्नी शासकों के भेदभाव का शिकार हो रहे हैं लेकिन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन पिछले महीने शुरु हुए जब मिस्र और ट्यूनीशिया में जन विद्रोह से सत्ता पलटी गई.

पिछले महीने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में सात प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद कल हुई हिंसा में दर्जनों लोग घायल हुए.

प्रदर्शनकारी पर्ल चौक पर क़ब्ज़ा किए बैठे हैं और आज उन्होंने आसपास के एक इलाक़े की नाकेबंदी कर दी.

बहरीन के प्रशासन ने खाड़ी सहयोग परिषद से मदद की गुहार लगाई जिसमें बहरीन के अलावा सउदी अरब, कुवैत, ओमान, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

आज सुबह सउदी अरब ने एक हज़ार सैनिक भेज दिए. प्रत्यक्षदर्शियों ने कोई 150 बख़्तरबंद गाड़ियों और कई अन्य वाहनों को बहरीन में दाख़िल होते देखा.

समझा जाता है कि ये सैनिक तेल और गैस के संयंत्रों और वित्तीय संस्थाओं की रखवाली करेंगे.

बहरीन के शाह हमद बिन इस्सा अल-ख़लीफ़ा ने प्रदर्शनकारियों के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा था.

आज युवराज ने फिर राष्ट्रीय वार्ता की बात कही और कहा कि उसमें प्रदर्शनकारियों की सभी प्रमुख मांगों पर विचार किया जाएगा लेकिन विपक्ष को उनके वादों पर यक़ीन नहीं है. विपक्ष और प्रदर्शनकारियों में से अधिकतर का कहना है कि वो राजशाही का तख़्ता नहीं पलटना चाहते लेकिन वो चाहते हैं कि राजपरिवार अपने अधिकतर अधिकार एक चुनी हुई संसद के हाथों सौंप दे.

लेकिन बहरीन के सुन्नी पड़ोसी देशों के हस्तक्षेप से बहरीन के शिया और सुन्नी समुदाय में तनाव और गहरा हो सकता है और इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है.

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