बहरीन में बाहरी सेना अस्वीकार्य: ईरान

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Image caption बहरीन में तीन महीनों के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी गई है

ईरान ने सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों की ओर से बहरीन में सेना भेजने के फैसले की निंदा की है. ईरान ने कहा है कि बहरीन के लोगों पर बल प्रयोग स्थिति को गंभीर बनाएगा.

इस बीच बिगड़ते हालात को लेकर सरकार ने बहरीन में तीन महीनों के लिए आपाताकाल की घोषणा कर दी है.

सोमवार को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने बहरीन की अपील पर वहां जन प्रदर्शन रोकने के लिए 1500 सैनिक भेजे थे.

दरअसल ईरान खाड़ी का एक प्रमुख शिया बहुल देश है और बहरीन में ज़्यादातर प्रदर्शनकारी शिया समुदाय के हैं.

बहरीन के बहुसंख्यक शिया लंबे समय से ये शिकायत करते रहे हैं कि वो सुन्नी शासकों के भेदभाव का शिकार हो रहे हैं लेकिन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन पिछले महीने शुरु हुए जब मिस्र और ट्यूनीशिया में जन विद्रोह से सत्ता पलट गई.

ईरान का कहना है कि बहरीन में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बाहरी सैनिकों को बुलाना बाहरी हस्तक्षेप है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रमीन मेहमानपरस्त ने कहा, “बाहरी सैनिकों का बहरीन में आना हमें कतई स्वीकार नहीं है. इससे वहां स्थिति और भी ख़राब हो सकती है. प्रदर्शनकारियों की जायज़ मांगों को दबाने के लिए हिंसा के प्रयोग को तुरंत रोक देना चाहिए.”

अमरीका बनाम सऊदी अरब

बीबीसी से विशेष बातचीत में दुबई में ‘द हिंदु’ अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार अतुल अनेजा ने कहा कि ईरान के इस वक्तव्य से बहरीन में तनाव बढ़ सकता है.

उन्होंने कहा, “अगर ईरान चेतावनी भरा वक्तव्य देता है और उसके बाद कोई कार्रवाई करता है, तब उस क्षेत्र में समीकरण बदल जाएगा. इसके बाद अमरीका और ईरान के बीच बातें शुरु हो जाएंगी जिससे कि तनाव और भी बढ़ सकता है.”

अतुल अनेजा का कहना है कि अमरीकी मीडिया में ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि सऊदी अरब अमरीका की बात पर अमल को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब का बहरीन में अपनी सेना भेजना अमरीका पर घटते विश्वास का संकेत है.

उनका कहना है कि सुन्नी और शिया समुदायों के बीच बढ़ते तनाव का असर लेबनान, इराक़ और सऊदी अरब के पूर्वी प्रांतों पर पड़ेगा.

खाड़ी के देशों की अमरीका से दूरी अमरीका के लिए कितनी बड़ी चुनौती साबित होगी इस मसले पर उन्होंने कहा, “अमरीका की सेना पहले से ही बेहद व्यस्त है और उन्हें कोरियाई प्रायद्वीप में अपना ध्यान केंद्रित रखना है. हम देख रहे हैं कि अमरीका लीबिया में 'उड़ान निषिद्घ क्षेत्र' बनाए जाने की बात से पीछे हट रहा है. मेरा ख़्याल है कि अमरीका की कमज़ोरी को देखते हुए सऊदी अरब ने बहरीन में इतना बड़ा कदम उठाया है.”

बहरीन में भेजे गए सैनिक खाड़ी देशों की सहयोग परिषद का हिस्सा हैं. इस परिषद में बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतार और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

माना जा रहा है कि इन सैनिकों को बहरीन में तेल और गैस के महत्तवपूर्ण संयंत्रों को बचाने के लिए भेजा गया है.

इस बीच अमरीकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बहरीन में हो रहे भारी प्रदर्शन के मद्देनज़र वहां जाने से बचें.

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