जापान: आग पर क़ाबू, विकिरण घटा

परमाणु विकिरण का ख़तरा

जापान के फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में लगी आग पर क़ाबू पाने के बाद विकिरण घटने लगा है. जापान ने संयंत्र 30 किमी दायरे को उड़ान निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है.

बुधवार को फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र के पहले रिएक्टर में एक और धमाका हुआ था जिसके बाद अधिकारियों ने कहा था कि संयंत्र में विकिरण का ख़तरा बढ़ रहा है और स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है.

इस धमाके के चलते संयंत्र में आग लग गई थी जो लंबे समय कर बुझाई नहीं जा सकी. इस वजह से हानिकारक किरणें सीधे वातावरण में शामिल हो गईं.

अधिकारियों का कहना था कि ऐसे संकेत मिले हैं कि इस धमाके से दूसरे रिएक्टर को नुक़सान पहुँचा है.

इलाका खाली कराया गया

संयंत्र के बाहर विकिरण का स्तर ज्यादा पाया गया और 20 किलोमीटर तक के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को वहाँ से हटा दिया गया था.

फ़ुकुशिमा संयंत्र में ये तीसरा धमाका था, जब इंजीनियर इस संयंत्र को ठंडा करने के प्रयासों में लगे हुए थे.

इससे पहले सोमवार को फुकुशिमा दायची संयंत्र के रिएक्टर 3 में हुए विस्फोट में 11 लोग घायल हुए थे.

भूकंप और सुनामी के कारण तबाह हुए परमाणु संयंत्र को ठंडा करने के प्रयासों के बीच जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में मदद की अपील की है.

जापान के इस परमाणु संयंत्र को सुनामी से भारी नुक़सान पहुँचा है. संयंत्र को ठंडा करने वाली प्रणाली फेल हो गई है जिससे विकिरण के रिसाव का गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय मदद

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से भी जापान ने मदद मांगी है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख युकियो अमानो ने कहा है कि जापान के अधिकारी फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में किसी भी विकिरण को रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं.

आईएईए प्रमुख ने कहा है कि चेरनोबिल जैसी दुर्घटना फ़ुकुशिमा में होने की संभावना नज़र नहीं आती.

युकियो अमानो ने कहा, ''जापान के परमाणु संयंत्र भूकंप से हिल गए, उनमें पानी भर गया, बिजली की आपूर्ति ठप हो गई, कर्मचारियों को पारिवारिक क्षति भी हुई लेकिन इन सबके बावजूद सभी परमाणु रिएक्टर सुरक्षित हैं और बहुत सीमित मात्रा में ही विकिरण हुआ है.''

इस बीच भूकंप और सुनामी से प्रभावित जापान के लाखों लोगों ने चौथी रात भी बिना भोजन, पानी, बिजली और गैस के बिताई है.

क्योडो समाचार एजेंसी का कहना है कि पांच लाख से ज्यादा लोग इस प्राकृतिक आपदा में बेघर हो गए हैं। कई इलाकों में संचार नेटवर्क अभी भी बंद पड़े हैं.

संयुक्त राष्ट्र जापान में भूकंप पीड़ितों के राहत और बचाव कार्य में लगा हुआ है.

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Image caption फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में धमाकों से अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ रही हैं

संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी एलिज़ाबेथ बायर्स ने बीबीसी को बताया है कि ऐसी भीषण आपदा का मुकाबला करने के लिए जापान की तैयारी किसी भी अन्य देश से बेहतर थी.

उनका कहना था, ''जापान के पास ऐसी आपदा से निपटने की बेहद मजबूत तैयारी है और इस मुश्किल घड़ी से उबरने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कारगर कोशिशें की जा रही हैं. संयुक्त राष्ट्र आपदा की इस घड़ी में जापान सरकार की मदद कर रहा है. मेरे ख्याल से ऐसी भीषण आपदा से निपटने में कोई देश जापान का मुक़ाबला नहीं कर सकता.''

अधिकारियों के मुताबिक जापान में अब तक दो हज़ार लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है हालांकि इस आंकड़े में उन सैकड़ों शवों को शामिल नहीं किया गया है जो जापान के पूर्वी तट पर बहकर आए हैं.

अंतरराष्ट्रीय चिंता

जापान में परमाणु संयंत्रों को पैदा हुए ख़तरों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ गई हैं.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने फ़ैसला किया है कि जर्मनी के पुराने हो चुके परमाणु संयंत्रों का जीवन काल आगे बढ़ाने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा.

स्विट्ज़रलैंड ने पूर्ण रुप से परमाणु रिएक्टरों की सुरक्षा संबंधी समीक्षा करने का फ़ैसला किया है और समीक्षा होने तक नए परमाणु संयंत्र बनाने पर रोक लगा दी है.

इस बीच इटली में परमाणु ऊर्जा विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है क्योंकि सरकार इस हफ्ते भविष्य में बनने वाले परमाणु संयंत्रों के स्थान पर विचार के लिए बैठक करने वाली है.

भारत ने कहा है कि वो ये निर्धारित करेगा कि परमाणु संयंत्र ऐसे क्षेत्रों में न हो जहां भूकंप आने की संभावना अधिक हो.

दक्षिण कोरिया और ताइवान ने भी अपने परमाणु कार्यक्रमों की पूर्ण समीक्षा करने की बात कही है. दक्षिण कोरिया अगले कुछ वर्षों में 14 नए रिएक्टर बनाने की प्रक्रिया में है.

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