नए संविधान पर जनमतसंग्रह

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मिस्र में पुराने संविधान में बदलाव के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनमतसंग्रह हो रहा है. मतदान कुछ घंटो में होगा.

पिछले महीने होस्नी मुबारक के सत्ता से बेदखल होने के बाद संविधान को निलंबित कर दिया गया था.

नए संविधान के लिए एक आयोग का गठन किया गया था. इस आयोग ने संविधान में नौ बदलावों का प्रस्ताव रखा है.

प्रस्ताव में राष्ट्रपति का कार्यकाल और आपातकाल लगाने के राष्ट्रपति के अधिकार को सीमित करना और चुनावों को पारदर्शी बनाना शामिल है.

मुबारक के जाने के बाद मिस्र में बनी सैन्य परिषद छह महीने या नए चुनाव होने तक सत्ता में रहेगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जनमतसंग्रह को देखकर लगता है कि मिस्र के नए सैन्य शासक इस जल्दबाज़ी में हैं कि सत्ता दोबारा आम लोगों के हाथ में सौंप दी जाए.

जनमतसंग्रह पर मतभेद

नए संविधान के लिए मतदान मुबारक को हटाए जाने के मात्र पाँच हफ़्ते बाद हो रहा है.सैन्य शासन जून में संसदीय चुनाव और अगस्त में राष्ट्रपति चुनाव कराने की भी योजना बना रहा है.

हालांकि संविधान पर हो रहे जनमतसंग्रह को लेकर उन लोगों के बीच मतभेद है जिन्होंने होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन अभियान चलाया था.

इनमें से कई नेता लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि संविधान में प्रस्तावित बदलावों को नकार दें.

इन नेताओं का तर्क है कि पूरा काम बहुत ही तेज़ी से किया गया है और संविधान में पर्याप्त बदलाव नहीं किए गए हैं.

वहीं कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि वाकई में सुधार हुआ है और संविधान में बदलावों को नकारने का मतलब होगा कि अनिश्चितकाल के लिए सेना को सत्ता में रहने देना.

चार करोड़ दस लाख लोग जनमतसंग्रह में हिस्सा ले सकते हैं और 54 हज़ार मतदान केंद्र बनाए गए हैं.कुछ लोग इसे मिस्र के इतिहास में पहला स्वतंत्र चुनाव मान रहे हैं.

कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद फ़रवरी 2011 में होस्नी मुबारक को अपना पद छोड़ना पड़ा था.उसके बाद संसद भी भंग कर दिया गया था.

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