गद्दाफ़ी समर्थक बेनग़ाज़ी में, पेरिस में महत्वपूर्ण बैठक

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Image caption विद्रोहियों का कहना है कि ये उनका विमान था (एएफ़पी फ़ोटो)

लीबिया सरकार की युद्धविराम की घोषणा के बावजूद ग़द्दाफ़ी समर्थक सेनाएँ विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहर बेनग़ाज़ी में दाख़िल हो गई हैं.

वहाँ कई इलाक़ों में संघर्ष की ख़बरें हैं.

हिंसा बढ़ने के डर से बड़ी संख्या में लोग बेनग़ाज़ी से पलायन कर रहे हैं.

इससे पहले वहाँ एक युद्धक विमान को मार गिराया गया. विद्रोहियों का कहना है कि यह उनका विमान था जिसे गद्दाफ़ी समर्थकों ने मार गिराया.

बेनग़ाज़ी से विद्रोहियों के एक नेता ने बताया है कि शहर में टैंकों और भारी हथियारों के साथ गद्दाफ़ी समर्थक सैनिक प्रवेश कर चुके हैं.

गद्दाफ़ी सरकार ने विद्रोहियों के दावे को ग़लत बताया है, लेकिन बेनग़ाज़ी में मौजूद पत्रकारों ने इस बात की पुष्टि की है कि शहर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में गद्दाफ़ी समर्थक टैंकों और भारी हथियारों के साथ लड़ाई में जुटे हुए हैं.

महत्वपूर्ण बैठक

लीबिया संकट पर पेरिस में एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही है जिसमें नो फ़्लाई ज़ोन के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देश भाग ले रहे हैं.

संयुक्तराष्ट्र महासचिव बान की मून भी ब्रिटेन, अमरीका, फ़्रांस और अरब देशों के नेताओं के साथ इस बैठक में शामिल हैं.

मून का कहना है कि दुनिया को लीबिया के बारे में 'एक सुर' में बोलना चाहिए.

दूसरी ओर लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने चेतावनी दी है कि लीबिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के लिए पश्चिमी देशों को पछताना पड़ेगा.

लेकिन गद्दाफ़ी की धमकियों पर ध्यान नहीं देते हुए ब्रिटेन, फ़्रांस और अन्य कई देश अपने विमान भूमध्यसागरीय इलाक़ों में तैनात करना शुरू कर चुके हैं.

संयुक्तराष्ट्र में फ़्रांस के दूत ने कहा है कि पेरिस बैठक ख़त्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर लीबिया के नागरिकों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सैनिक कार्रवाई शुरू हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'हर ज़रूरी क़दम' उठाए जाने को अधिकृत कर दिया था.

ओबामा का अल्टीमेटम

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि ग़द्दाफ़ी समर्थक सेनाएँ या तो विद्रोहियों के इलाक़ों पर हमला करना बंद करें या सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हो जाएँ.

ओबामा ने कहा, "ग़द्दाफ़ी को अपनी सैन्य टुकड़ियाँ बेनग़ाज़ी की ओर बढ़ने से रोकनी होंगी, उन्हें अजदाबिया, मिस्राता और ज़ाविया से वापस बुलाना होगा और सभी क्षेत्रों में पानी,बिजली और गैस की आपूर्ति बहाल करनी होगी".

लेकिन प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अमरीकी थल सेना के इस्तेमाल से इनकार कर दिया.

इससे पहले सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव पारित होते ही कर्नल ग़द्दाफ़ी की सरकार ने एकतरफ़ा युद्धविराम का ऐलान किया था.

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