'संशोधन के हक में मतदान किया'

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Image caption लाखों लोगों ने जनमत संग्रह में वोट डाला है

मिस्र में संविधान में संशोधन के लिए हुए जनमत संग्रह को लेकर चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतदाताओं ने व्यापक स्तर पर संविधान में संशोधन के हक में मतदान किया है.

अधिकारिक नतीजों के मुताबिक 77 फ़ीसदी मतदाताओं ने संशोधन के हक में मतदान किया है.

संविधान में हुए ये संशोधन अगले छह महीनों में राष्ट्रपति व संसदीय चुनावों के लिए रास्ता तय करेंगे.

अंतरिम प्रशासन की ओर से कराए गए इस जनमत संग्रह में राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित करने और देश में आपातकाल पर रोक लगाने को लेकर संविधान में संशोधन के प्रस्ताव पर जनता की राय मांगी गई है.

अधिकारियों के मुताबिक मतदान का अधिकार रखने वाले लगभग 41 फीसदी लोगों ने इस मतदान संग्रह में भाग लिया.

पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के सत्ता से हटने के सिर्फ़ पांच हफ़्ते बाद होने वाले जनमत संग्रह का मुख्य उद्देश्य मिस्र के संविधान में लोकतांत्रिक तरीक़े से संशोधन करना है.

'संशोधन के हक में मतदान'

इस समय मिस्र की सत्ता संभाल रही सैन्य परिषद की निगरानी में ये जनमत संग्रह हुए हैं जिसमें भविष्य में चुने जाने वाले राष्ट्रपति के कार्यकाल और आपातकाल लागू करने के अधिकार पर पाबंदी लगाने के बारे में फै़सला किया जाएगा.

इन संशोधनों को अगर लोगों की मंज़ूरी मिल जाती है तो सैन्य परिषद आने वाले जून के महीने में राष्ट्रपति और संसद के चुनाव करवाने का फैसला कर सकती है.

मिस्र के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद बादी ने कहा कि मिस्र की जनता आख़िरकार अपना नेता चुनने के लिए आज़ाद है.

उन्होंने कहा, "मिस्र के लोगों को को आज ये विश्वास हो गया है कि आख़िरकार अब उनकी आवाज़ सुनी जाएगी. उन्हें अपना विश्वास तय करने की दोबारा आज़ादी मिल गई है और हर कोई उनकी पसंद का ख्याल रखेगा".

जनमत संग्रह में भाग लेना ऐसा मौक़ा था जो वहाँ के मतदाताओं को शायद पहले कभी नहीं मिला था. लंबी लंबी क़तारों में खड़े होकर अपना वोट डाल रहे थे.

पूर्व राष्ट्रपति मुबारक के समय में चुनाव होते तो थे लेकिन उनमें लोगों की भागीदारी बहुत कम होती थी और चुनाव के नतीजे पहले से तय होते थे.

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