रूस-चीन ने लीबिया पर हमलों की आलोचना की

एक अमरीकी युद्धपोत से दागा गया मिसाइल इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption अमरीकी युद्धपोत यूएसएस बैरी और स्टाऊट मिसाइलें दाग रहे हैं

लीबिया के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के बाद रविवार तड़के से पश्चिमी देशों ने लीबियाई शहरों पर लड़ाकू विमानों से बमबारी और मिसाइल हमले शुरु कर दिए हैं.

जहाँ पश्चिमी देशों का लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी के बारे में कड़ा रवैया बरक़रार है, वहीं रूस, चीन और अफ़्रीकी यूनियन ने इस हमलों की आलोचना की है.

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ग़ौरतलब है कि चीन, रूस, जर्मनी, भारत और ब्रज़ील सुयंक्त राष्ट्र में लीबिया पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के मतदान के दौरान ग़ैर-हाज़िर रहे थे.

रूस ने कहा है कि उसे अफ़सोस है कि पश्चमी देशों ने सैन्य कार्रवाई करने का फ़ैसला किया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की है.

अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस ने लीबिया पर सौ से ज़्यादा मिसाइलें दागीं

उधर अफ़्रीकी यूनियन ने अपील की है कि लीबिया पर हमले तत्काल बंद होने चाहिए और वहाँ रह रहे अफ़्रीकी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने भी सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है.

अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस का रुख़ कड़ा

दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ब्राज़ील में अपनी यात्रा के दौरान कहा है कि अमरीका एक गठबंधन के हिस्से के तहत 'सीमित सैन्य कार्रवाई' कर रहा है.

उनका कहना था, "जब एक निर्दयी शासक अपने लोगों से कह रहा हो कि वह किसी को नहीं बख़्शेगा और उसकी सेनाएँ अपने ही लोगों पर हमले तेज़ कर रही हो तो हम चुप नहीं बैठ सकते...अमरीकी थल सेना इस अभियान में हिस्सा नहीं लेंगी."

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उधर ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा, "लीबिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई ज़रूरी है, वैध है और सही है...संयुक्त राष्ट्र ने इसकी अनुमति दी है. संघर्षविराम की बात करने के बाद, इसके ठीक उलट कर्नल गद्दाफ़ी की सेनाओं ने नागरिकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं...जब ये तानाशाह अपने ही लोगों की हत्या कर रहा है तब हमें चुप नहीं बैठना चाहिए."

फ़्रांस के विदेश मंत्री एलेन जूप ने ख़ासा आक्रामक रुख़ अपनाते हुए कहा है, "फ़्रांस का अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कर्नल गद्दाफ़ी अपने लोगों के ख़िलाफ़ पूरी तरह से हिंसा बंद नहीं कर देते, जिन इलाक़ों में उनके सैनिक दाख़िल हुए हैं वहाँ से उन्हें वापस नहीं बुला लेते और लीबियाई लोगों को आज़ादी और लोकतंत्र की भावनाओं को व्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं देते."

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