जनमतसंग्रह में लाखों ने हिस्सा लिया

  • 20 मार्च 2011
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मिस्र में पुराने संविधान में बदलाव के मुद्दे पर जनमतसंग्रह के लिए लाखों लोगों ने मतदान किया है. शुरुआती नतीजे रविवार को आने की उम्मीद है.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ज़्यादातर लोगों के लिए ये शायद पहला मौका रहा जब उन्होंने निष्पक्ष मतदान में हिस्सा लिया.

हालांकि जनमतसंग्रह को लेकर उन लोगों के बीच मतभेद रहा जिन्होंने होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन अभियान चलाया था.

कुछ लोगों का तर्क है कि पूरा काम बहुत ही तेज़ी से किया गया है और संविधान में पर्याप्त बदलाव नहीं किए गए हैं.

काहिरा में जब विपक्ष के नेता मोहम्मद अल बारादेई वोट डालने गए तो लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया.

रॉयटर्स के मुताबिक कुछ युवाओं ने उनकी कार पर पत्थर फेंके और नारे लगाए- हमें आपकी ज़रूरत नहीं है.बताया जा रहा है कि बारादेई उस मतदान केंद्र में वोट नहीं डाल सके और उन्हें कहीं और जाना पड़ा.

बारादेई ने कहा है कि मुबारक के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले लोग प्रस्तावित बदलावों के पक्ष में वोट नहीं डालेंगे. उनका कहना था कि प्रस्तावों में राष्ट्रपति की अधिकारों में बदलाव की बात और स्वतंत्र संविधान सभा की बात नहीं की गई है.

संविधान में बदलाव

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पिछले महीने होस्नी मुबारक के सत्ता से बेदखल होने के बाद संविधान को निलंबित कर दिया गया था.

नए संविधान के लिए एक आयोग का गठन किया गया था. इस आयोग ने संविधान में नौ बदलावों का प्रस्ताव रखा है.

प्रस्ताव में राष्ट्रपति का कार्यकाल और आपातकाल लगाने के राष्ट्रपति के अधिकार को सीमित करना और चुनावों को पारदर्शी बनाना शामिल है.

मुबारक के जाने के बाद मिस्र में बनी सैन्य परिषद छह महीने या नए चुनाव होने तक सत्ता में रहेगी.

चार करोड़ दस लाख लोग जनमतसंग्रह में हिस्सा ले सकते हैं. कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद फ़रवरी 2011 में होस्नी मुबारक को अपना पद छोड़ना पड़ा था. उसके बाद संसद भी भंग कर दिया गया था.

अगर जनमतसंग्रह में संविधान में बदलाव के प्रस्तावों को मंज़ूरी मिल जाती है तो सैन्य परिषद अगले कुछ महीनों में संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव करवा सकती है.

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