लीबिया में घमासान लेकिन निशाने पर नहीं गद्दाफ़ी

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पश्चिमी सेनाओं की ओर से लीबिया में जारी ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बावजूद सेना और कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थक सैनिकों के बीच घमासान जारी है.

लीबिया में जारी हवाई हमलों की तीसरी रात राजधानी त्रिपोली में कई धमाके हुए और कई जगह बारुद से लगी आग फैली है.

खबरों के मुताबिक मिसराता शहर पर हुए हमलों में कम से कम से नौ गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों की मौत हो गई है.

लीबियाई सरकार का कहना है कि राजधानी के पास मछुआरों के एक गांव और नौसेना के अड्डे पर भी हवाई हमले किए गए हैं.

शहरों में रहने वाले लोगों का कहना है गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों ने पानी की सप्लाई काट दी है.

पूर्वी लीबिया में सैनिकों ने बेनग़ाज़ी शहर से गद्दाफ़ी के विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए टैंकों का इस्तेमाल किया.

'गद्दाफ़ी को निशाना बनाने का इरादा नहीं'

इससे पहले अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा था कि लीबिया में किए जा रहे हवाई हमलों के ज़रिए कर्नल गद्दाफ़ी को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कहा है कि अमरीका भले ही यह चाहता हो कि कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता छोड़ दें लेकिन गठबंधन सेनाओं का मकसद लीबिया में तख्ता पलट करना नहीं है.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी सेना का मकसद लीबिया में युद्धविराम लागू करना और नागरिकों पर हो रहे हमलों को रोकना भर है.

ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबिया में ‘नो फ्लाई ज़ोन’ को मंज़ूरी दे दी है. इस प्रस्ताव का मतलब है कि लीबियाई हवाई सीमा में राहत सामग्री ले जा रहे विमानों को छोड़कर सभी उड़ानों पर प्रतिबंध होगा.

‘नो फ्लाई जोन’ से आगे बढ़े

इस बीच अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा ने कहा है कि वो लीबिया सरकार के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई संबंधी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का सम्मान करते हैं.

लीबिया पर पश्चिमी देशों के हवाई हमले शुरु होने के एक दिन बाद अम्र मूसा ने कहा था कि पश्चिमी सेनाएं अपने मकसद से भटक रही हैं और लीबिया में हो रहे हमले ‘नो फ्लाई जोन’ लागू करने से आगे बढ़ चुके हैं.

उधर लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के विरोधी इन हवाई हमलों के बाद राहत महसूस कर रहे हैं और जश्न मना रहे हैं.

तोबरुक में मौजूद बीबीसी संवाददाता के अनुसार विद्रोहियों को लगता है कि हवाई हमलों के बाद गद्दाफ़ी की वफादार सेना में विद्रोह हो सकता है.

इससे पहले खाड़ी के अरब देशों ने ज़ोर देकर कहा था कि वो लीबिया के मामले में अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे.

उल्लेखनीय है कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए लड़ाकू विमान भी मुहैया कराए हैं.

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