ब्रिटेन: छात्र वीज़ा कड़े हुए नियम

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Image caption ब्रिटेन की गृहमंत्री टेरेसा मे हाउस ऑफ़ कॉमन्स में छात्र वीज़ा नियमों में परिवर्तन की योजना पर बोलती हुईं.

ब्रिटेन ने छात्र वीज़ा नियमों में कई परिवर्तन किए हैं जिनका असर वहां पढ़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है.

अब ब्रिटेन जाने वाले छात्रों को विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए कड़ी योग्याताओं का सामना करना पड़ेगा और साथ ही पढ़ाई के बाद कामकाज करने में भी पहले से अधिक मुश्किल से निपटना पड़ेगा.

यूके बॉर्डर एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक क्रिस डिक्स ने कहा है कि जिन छात्रों को विश्वविद्यालयों ने स्पांसर नहीं किया है उनपर पढ़ाई के बाद काम करने पर रोक लगा दी जाएगी.

क्रिस डिक्स के अनुसार नए नियमों का मक़सद छात्र वीज़ा का दुरुपयोग करने वाले एजेंटों को रोकना है.

नए नियम के अनुसार सिर्फ़ सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को नौकरी करने का अधिकार होगा. बाक़ी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वालों को ये अधिकार नहीं होगा.

योग्यताओं में परिवर्तन

Image caption ब्रिटेन ने छात्र वीज़ा के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े क़दम उठाए

अब तक सभी छात्रों को किसी भी प्रकार का काम करने या दो साल तक बिना नौकरी किए रहने की इजाज़त थी.

ये परिवर्तन आने वाले 12 महीनों में सिलसिलेवार लागू किए जाएंगे. साथ ही ब्रिटेन में पढ़ाई के लिए प्रवेश योग्यता में भी परिवर्तन किए गए हैं. अब अंग्रेज़ी बोलने की क्षमता का स्तर मौजूदा बी 1 के बजाय बी 2 किया जा रहा है.

इसके अलावा अब केवल ऐसे ही स्नातकोत्तर विद्यार्थी ही आश्रितों को अपने साथ ब्रिटेन ले जा पाएंगे जो 12 महीनों से अधिक का कोई कोर्स कर रहे होंगे. लेकिन सरकार द्वारा स्पांसर छात्र अब भी पहले की तरह अपने आश्रितों के साथ ला पाएंगे.

नए नियमों के तहत छात्रों को स्पांसर करने वाले हर कॉलेज या विश्वविद्यालय को ब्रिटेन की सरकारी शिक्षा निरीक्षण संस्थाओं में अपना पंजीकरण करवाना होगा.

यूके बॉर्डर एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक क्रिस डिक्स के अनुसार मौजूदा सिस्टम में ऐसा कोई प्रावधान ना होने के कारण कई निम्म स्तर के कॉलेज भी छात्रों को स्पांसर करते रहे हैं.

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