चीन को लेकर दुनिया के देशों में बेचैनी बढ़ी

  • 28 मार्च 2011
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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के दुनियाभर में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि चीन की बढ़ती आर्थिक ताक़त को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ी हैं.

सर्वेक्षण में चीन की बढ़ती आर्थिक ताक़त को ख़राब मानने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, ख़ासकर चीन से बड़े पैमाने पर कारोबार करने वाले जी-7 देशों में ऐसा मानने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है.

बीबीसी के लिए ये सर्वेक्षण ग्लोबस्कैन और प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पॉलिसी एटीट्यूट (पीआईपीए) ने किया था और इसमें 27 देशों के 28,619 लोगों से दो दिसंबर, 2010 से चार फ़रवरी, 2011 के बीच बातचीत की गई.

पाकिस्तान के लोगों का चीन की बढ़ती ताक़त के प्रति सबसे अधिक सकारात्मक नज़रिया था, वहाँ ऐसी राय रखने वाले 74 फ़ीसदी थे.

लेकिन भारत में चीन की आर्थिक प्रभाव पर सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या 2005 के 68 से घटकर 53 फ़ीसदी हो गई है.

पाकिस्तान में चीन की सैन्य शक्ति को सराहने वालों की संख्या 61 फ़ीसदी रही जबकि भारत में 2005 में 56 फ़ीसदी से ये संख्या गिरकर 44 फ़ीसदी हो गई है.

चीन को लेकर बेचैनी

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने 2005 में भी ऐसा ही सर्वेक्षण किया था, तब से अब चीन की आर्थिक ताक़त बढ़ने पर नकारात्मक रुख़ रखने वाले लोगों की संख्या फ्रांस में 31 से बढ़कर 53 फ़ीसदी हो गई.

कनाडा में भी यही स्थिति है, वहाँ चीन के बारे में नकारात्मक राय रखने वाले 37 से 55 फ़ीसदी हो गए हैं.

इसी तरह जर्मनी में 44 से 53 और अमरीका में ऐसी राय रखने वाले 45 से 54 फ़ीसदी हो गए हैं.

ब्रिटेन में ऐसे लोगों की संख्या 34 से 41 फ़ीसदी और मैक्सिको में 18 से 43 फ़ीसदी हो गई है.

ग्लोब स्कैन के चेयरमैन डग मिलर का कहना था, ''वर्ष 2005 की तुलना में चीन की चमत्कारिक आर्थिक प्रगति ज़्यादा विवादास्पद है. आर्थिक मंदी के बाद जी7 देशों के नागरिक इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि वे चीन से कैसे प्रतिस्पर्धा कर पाएँगे.''

अनेक देशों में चीन की आर्थिक ताक़त को लेकर बढ़ती बेचैनी के बावजूद सकारात्मक रुख़ रखने वाले देश भी हैं.

दो अफ़्रीक़ी देश इसमें सबसे आगे हैं. नाइजीरिया में 82 फ़ीसदी और कीनिया में 77 फ़ीसदी लोग चीन के बारे में सकारात्मक रुख़ रखते हैं.

इस सर्वेक्षण में पाया गया कि बड़ी संख्या में लोग ऐसा मानते हैं कि चीन अन्य देशों के साथ कारोबार में अनुचित तरीक़े अपनाता है.

प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पोलिसी एटीट्यूट के निदेशक स्टीवन कल का कहना था, ''ये सर्वेक्षण बताता है कि चीन की छवि अनुचित तरीक़े अपनाने वाले की बन रही है, इससे उससे कारोबार करने वाले बड़े देश दूर हो सकते हैं, साथ ही सैन्य क्षेत्र में विस्तार पर पड़ोसी देश चौकन्नी निगाह रख रहे हैं.''

सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वालों में से 35 फ़ीसदी का मानना था कि चीन अपने कारोबार में अनुचित तरीक़े अपनाता है जबकि 28 फ़ीसदी ने यही बात अमरीका के बारे में और 20 फ़ीसदी ने यूरोपीय संघ के बारे में कही.

अगले दस वर्षों में चीन आर्थिक महत्व के मामले में अमरीका को पीछे छोड़ देगा, ऐसा बड़ी संख्या में लोग मानते हैं.

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