इतिहास के पन्नों से: अमरीकी परमाणु संयंत्र में 'लीक' और मार्टिन लूथर का ऐतिहासिक मार्च

अगर इतिहास के पन्नों में झांके तो 28 मार्च के दिन की कुछ प्रमुख घटनाएँ हैं - अमरीकी परमाणु संयंत्र थ्री माईल से निकली रेडियो सक्रिय विकिरणों का मुद्दा और काले अमरीकियों के अधिकारों के लिए मार्टिन लूथर किंग का एतिहासिक मार्च:

1979: अमरीकी परमाणु संयंत्र से निकली रेडियो सक्रिय विकिरणें

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Image caption ये अमरीका की सबसे भयावह परमाणु दुर्घटना थी

आजकल जापान के फ़ुकुशीमा परमाणु संयंत्र में रेडियो सक्रिय विकिरणों की ख़ासी चर्चा है.

लेकिन क्या आपको पता है कि 28 मार्च 1979 को भी रेडियो सक्रिय विकिरणों का मुद्दा सुर्खिया बटोर रहा था?

एक अमरीकी परमाणु संयंत्र से रेडियो सक्रिय भाफ की लीक ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी. अमरीका के पेन्नसिलवेनिया के थ्री माइल आएलैंड परमाणु संयंत्र में एक दुर्घटना के बाद ऐसा हुआ. ये डर भी व्यक्त किया गया कि हो सकता है कि संयंत्र के 500 कर्मचारी विकिरणों से प्रभावित हो गए हों.

प्रशासन ने आपात स्थिति की घोषणा तो कर दी लेकिन जनता को लीक के पाँच घंटे बाद ही बताया गया.

इलाक़े की नागरिक सुरक्षा संस्था के निदेशक ले जैक्सन का कहना था, "संयंत्र परिसर में पागलखाने जैसी स्थिति थी." संयंत्र के पाँच मील के क्षेत्र में बच्चों और महिलाओं को इलाक़े से बाहर चले जाने के लिए कहा गया.

इस दुर्घटना में किसी की मृत्यु तो नहीं हुई लेकिन अमरीका के इतिहास में ये सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना थी.

1989: सोवियत संघ में लाखों ने मतदान में हिस्सा लिया

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Image caption एलाबामा के गवर्नर ने मार्टिन लूथर के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया

सोवियत संघ के इतिहास में पहली बार लोगों ने ऐसे चुनाव में भाग लिया जिसमें वे आधिकारिक कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के अलावा किसी अन्य प्रत्याशी के लिए वोट दे सकते थे.

इस चुनाव में कई दिग्गज कम्युनिस्ट नेता हार गए.

मॉस्को के एक शहरी ने इन चुनावों पर कुछ इस तरह की टिप्पणी, "पिछले 72 सालों में इस तरह का कुछ नहीं हुआ है."

राष्ट्रपति मिखाइल गॉर्बेचोव के राष्ट्रपति रहते हुए ये चुनाव कराए गए. इन चुनोवों का सरकारी सोवियत अख़बार इज़वेस्तिया ने स्वागत किया.

पोलित्ब्यूरो से निकाले जा चुके बोरिस येल्त्सिन ने मॉस्को से 89 प्रतिशत मतों के साथ चुनाव जीता. बाद में वे रूस के राष्ट्रपति भी बने.

1965: काले अमरीकियों के अधिकारों के लिए मार्टिन लूथर किंग का ऐतिहासिक मार्च

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Image caption यूरोफ़ाइटर को भविष्य का लड़ाकू विमान कहा गया था.

एक काले अमरीकी बराक ओबामा वर्ष 2008 में अमरीका के राष्ट्रपति बने. लेकिन काले अमरीकियों को इस सफ़र को तय करने में कितने लंबे सफ़र को तय करना पड़ा, ये पता चलता है वर्ष 1965 की एक घटना से.

उस समय डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग काले अमरीकियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे.

उन्होंने काले अमरीकियों की शिकायतों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए एलाबामा की राजधानी मॉंटगुमरी में लगभग 25 हज़ार लोगों के जुलूस का नेतृत्व किया.

उन्होंने कहा, "हमारा मक़सद श्वेत व्यक्ति को शर्मिंदा करना नहीं है बल्कि उसकी दोस्ती और भरोसा जीतना है." ग़ौरतलब है कि प्रांत के गवर्नर जॉर्ज वॉलेस ने मार्टिन लूथर किंग के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया.

महत्वपूर्ण है कि ये मार्च अमरीका में नागरिक अधिकारों का क़ानून बनने के कुछ ही महीने बाद हुआ था.

इस क़ानून के तहत रंग, नस्ल, धर्म और राष्ट्रीय मूल के अलग रखते हुए सभी अमरीकियों को समान अधिकार देने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन कई राज्यों ने ऐसे कई क़दम उठाए ताकि इस क़ानून को लागू करने से बच सकें.

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