इतिहास से: अमरीकी सैनिक को सज़ा; पहली लंदन मैराथन

अगर इतिहास के पन्नों में झांके तो 29 मार्च के दिन की कुछ प्रमुख घटनाएँ हैं - एक अमरीकी सैनिक को वियतनाम के माई लाई और अन्य गावों में निहत्थे नागरिकों की हत्या में शामिल होने का दोषी पाया गया और पहली बार दौड़ी गई लंदन मैराथन:

1971: अमरीकी सैनिक माई लाई में नागरिकों पर कार्रवाई का दोषी

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Image caption माई लाई की घटना से अमरीकी सेना की बहुत बदनामी हुई

अमरीका में लेफ़्टेनेंट विलियम केली को केंद्रीय वियतनाम में माई लाई और अन्य गांवों में 500 निहत्थे दक्षिणी वियतनामी नागरिकों की हत्या के मामले में शामिल होने का दोषी पाया गया.

वर्ष 1968 की इस घटना में अमरीकी सैनिकों ने इन गावों के नागरिकों पर गोलियाँ चलाईं और इस सैनिकों में शामिल थी ग्यारहवी इन्फ़ेंट्री ब्रिगेड की चर्ली कंपनी जिसकी कमान लेफ्टेनेंट विलियम केली संभाल रहे थे.

केली का कहना था कि वे केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन कर रहे थे लेकिन सैन्य अदालत ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया.

आपको याद दिलाना ज़रूरी है कि शीत युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट देशों के प्रभाव को सीमित करने के लिए अमरीकी सैनिकों ने 1960 के दशक के अंत में वियतनाम में भीषण युद्ध लड़ा था जिसकी अमरीका के भीतर और बाहर कड़ी आलोचना हुई थी.

माई लाई की घटना में दरअसल सैनिक कम्युनिस्ट संगठन वियत कॉंग के सदस्यों को खोजते हुए इन गावों में पहुँचे थे, लेकिन वियत कॉंग के लड़ाके वहाँ थे ही नहीं.

इस जनसंहार का पता तब चला जब खोजी पत्रकारों ने अपनी रिपोर्टें छापीं.

केली को उम्र कैद की सजा हुई लेकिन उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के आदेश पर रिहा कर दिया गया.

इसके बाद वे तीन साल घर में ही नज़रबंद रहे. उनकी सज़ा को घटाकर दस साल कर दिया गया पर उन्होंने इसका केवल एक-तिहाई समय ही जेल में गुज़ारा और वे 1974 में रिहा हो गए.

1981: पहली बार हुई लंदन मैराथन

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Image caption पहली लंदन मराथन का विचार ओलंपिक खिलाड़ी क्रिस ब्रेशर के दिमाग में आया

इस दिन रविवार को हज़ारों लोग लंदन की सड़कों पर उतरे और शहर की पहली मैराथन का आयोजन हुआ. लगभग 26 मील की इस मैराथन में पहली बार 6700 लोगों ने भाग लिया.

इसका विचार सबसे पहले एक ओलंपिक खिलाड़ी क्रिस ब्रेशर के दिमाग में आया था और इसके बाद से ये हर साल आयोजित होता है.

कई वर्षो में लगभग 90 हज़ार लोगों ने इसमें भाग लिया है और हर साल इसमें औसत 30 हज़ार लोग भाग लेते हैं.

अनेक जानी-मानी हस्तियाँ भी इसमें भाग लेती हैं और इसने भाईचारे के एक उत्सव की शक्ल इख़ितियार कर ली है.

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