वॉलमार्ट के ख़िलाफ़ लिंग भेद का आरोप

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Image caption ये मुक़दमा कारपोरेट जगत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है.

खुदरा व्यापार की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट के ख़िलाफ़ लिंग भेद के आरोप लगे हैं और मामला अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है जिसे ये तय करना है कि कंपनी के ख़िलाफ़ लिंग भेद का मुक़दमा चलना चाहिए या नही.

इस दिलचस्प केस में एक तरफ़ खुदरा व्यापार की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है और दूसरी तरफ़ उसी में काम करने वाली कुछ महिलाएं.

वॉलमार्ट में काम करने वाली छह महिलाओं ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि महिला होने के कारण उनके वेतन में वृद्धि नहीं की गई और उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई. वो महिलाएं कंपनी में काम करने वाली लाखों महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हए कंपनी के ख़िलाफ़ क्लास ऐक्शन मुक़दमा यानि एक वर्ग विशेष के साथ भेद भाव करने का मुक़दमा चलाने की मांग कर रही हैं.

वॉलमार्ट के ख़िलाफ़ मुक़दमा करने वाली महिलाओं का कहना है कि कंपनी ने अमरीका भर में अपनी दुकानों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ योजनाबद्ध तरीक़े से भेद भाव किया है.

'लिंग भेद भाव'

मुक़दमा करने वाली छह महिलाओं में से एक क्रिस्टीन क्वापनाओस्की का कहना है कि महिला होने के नाते पुरुष कर्मचारियों के मुक़ाबले वेतन और पदोन्नति के मामले में उनेक साथ नाइंसाफ़ी की गई.

बीबीसी से बात करते हुए क्रिस्टीन ने कहा कि मैने अपने मैनेजर से पूछा कि पदोन्नति पाने के लिए मुझे क्या करने की ज़रूरत है, मेरे मैनेजर ने कहा कि आप अपने मेकअप को बेहतर करें और गुड़िया की तरह सुंदर दिखें.

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Image caption क्रिस्टीन क्वापनाओस्की वालमार्ट में काम करने वाली लाखों महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

ये महिलाएं 1964 के नागरिक अधिकार क़ानून के तहत मुक़दमा चलाए जाने की मांग कर रही हैं. उनकी दलील है कि लिंग के आधार पर भेद भाव की नीति पूरी वॉलमार्ट कंपनी में अपनाई जाती है.

क्लास ऐक्शन मुक़दमे के तहत पूरे अमरीका में कंपनी के 3400 दुकानों में दिसंबर 1998 से काम करने वाली या काम कर चुकी किसी भी महिला को राहत मिल सकती है.

दो निचली अदालतों ने क्लास ऐक्शन का मुक़दमा चलाने के आदेश दिए थे जिसको चुनौती देते हुए कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कोई भी फ़ैसला जून से पहले आने की संभावना नही है.

वॉलमार्ट कंपनी इन आरोपों का खंडन करती है और उनके मुताबिक़ कंपनी अपने महिला कर्मचारियों को उचित पदोन्नति और वेतन देती है. कंपनी के अनुसार उसने महिलाओं के लिए काम करने की बेहतरीन जगह होने के कई पुरस्कार जीते हैं और कई वरिष्ठ अधिकारी महिलाएं हैं.

कंपनी के प्रवक्ता ग्रेग रौज़ीटर का कहना है, "वॉलमार्ट कंपनी किसी भी भेद भाव के ख़िलाफ़ नीति बहुत सख़्त है और ये नीतियां इसी को सुनिश्चित करने के लिए हैं कि महिलाएं को सही तरह से पदोन्नत किया जाए और उन्हें सही वेतन दिया जाए".

कंपनी का कहना है कि अगर किसी विशेष महिला कर्मचारी की कोई शिकायत है तो उसे सुना जा सकता है लेकिन सामूहिक तौर पर नहीं.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद क्रिस्टीन क्वापनाओस्की ने विश्वास जताया कि अदालत का फ़ैसला उनके हक़ में होगा.

क्वापनाओस्की ने कहा, "ये मामला दस साल से चल रहा है और ये ऐसी लड़ाई है जो लड़ने के लायक़ है और हमलोग आख़िरी दम तक ये लड़ाई जारी रखेंगें".

अगर सुप्रीम कोर्ट क्लास ऐक्शन का मुक़दमा चलाने का आदेश देता है तो इसका पूरे अमरीका के कारपोरेट जगत पर असर पड़ेगा और इससे अन्य कई तरह के भेद भाव के मामले सामने आ सकते हैं.