इतिहास के पन्नों से : भारत में दलाई लामा, अंबेडकर को भारत रत्न

दलाई लामा इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption 31 मार्च, 1990 को दलाई लामा भारत पहुंचे

इतिहास में 31 मार्च को कई घटनाएं दर्ज हैं. आज ही के दिन 1959 को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 15 दिन की पदयात्रा कर भारत की सीमा में पहुंचे थे.

17 मार्च को 20 शिष्यों के साथ ल्हासा छोड़ने के बाद से उनकी सलामती की कोई ख़बर नहीं थी.

कई लोगों को लग रहा था कि तिब्बत में हुए जनांदोलन को कुचलने के लिए चीन की सरकार ने जो कार्रवाई की थी उसी में दलाई लामा मारे गए होंगे.

लेकिन हक़ीक़त में दलाई लामा खेनज़ीमन दर्रे से होकर भारत चले आए थे और तब से लेकर आज तक हिमाचल प्रदेश के तवांग मठ में रह रहे हैं.

भारत सरकार ने उन्हें राजनीतिक संरक्षण दे रखा है.

पोल टैक्स के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption टोल टैक्स को लेकर लंदन में हिंसा

31 मार्च साल 1990 को पोल टैक्स यानी प्रति व्यक्ति कर के ख़िलाफ़ लंदन में क़रीब 70 हज़ार लोग सड़कों पर उतर आए थे.

लंदन में पिछले सौ साल के इतिहास में विरोध प्रदर्शन की ये सबसे बड़ी घटना थी जिसमें हिंसा भी हुई थी और 113 लोग ज़ख्मी हुए थे.

पोल टैक्स का विरोध कर रहे 340 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न

अगर भारत की बात करें तो देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर को 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था.

'बाबासाहब' के नाम से मशहूर भीमराव अंबेडकर का छह दिसंबर 1956 को निधन हो गया था.

डॉ अंबेडकर ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और जीवनभर सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ते रहे थे.

संबंधित समाचार