बांगलादेश में हुए प्रदर्शन में एक की मौत

  • 3 अप्रैल 2011
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Image caption बांगलादेश में महिलाओं को सम्पत्ति में समान अधिकार देने के प्रस्ताव का विरोध

बांगलादेश में रविवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में मदरसे का एक छात्र मारा गया और 30 अन्य घायल हो गए.

महिलाओं को सम्पत्ति के समान अधिकार दिए जाने की सरकारी नीति के ख़िलाफ़ 'इस्लामी ओइको जोट' नामक संगठन ने सोमवार को देशव्यापी हड़ताल बुलाई है.

बांगलादेश के क़ानून के अधीन एक महिला को अपने भाई से आधी सम्पत्ति मिलती है.

जबकि सरकार महिलाओं को सम्पत्ति में बराबर का अधिकार दिलाना चाहती है.

इसके विरोध में शनिवार को दक्षिण पश्चिमी नगर जैसोर में प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया.

प्रदर्शन के एक नेता ने कहा कि छात्र को पुलिस ने मारा है जबकि पुलिस ने इससे इंकार करते हुए कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों के पास हथियार थे.

महिला संगठनों की मांग

बांगलादेश की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी मुसलमान है लेकिन वहां की क़ानूनी प्रणाली धर्मनिरपेक्ष है. जबकि उत्तराधिकार के मामले में शरीया का पालन किया जाता है.

महिला संगठन लम्बे समय से इसमें परिवर्तन की मांग करते रहे हैं.

नए नियमों के अधीन सभी बच्चों को बराबर की सम्पत्ति मिलने का प्रस्ताव है.

यूं तो इसकी घोषणा पिछले साल हुई थी लेकिन इसे लागू नहीं किया गया.

राजधानी ढाका में सैकड़ों महिलाओं ने उन लोगों के विरोध में रैली निकाली जो इस नई नीति का विरोध कर रहे हैं.

विमेन सोसायटी नामक संगठन की अध्यक्ष आएशा ख़ानम ने कहा, "महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार की गई नीति का हम समर्थन करते हैं जो इस्लाम के अनुकूल है".

जबकि 'इस्लामी ओइको जोट' संगठन का तर्क है इससे शरीया का उल्लंघन होगा क्योंकि महिलाएं शिक्षा, नौकरियों और सम्पत्ति में पुरुषों की बराबरी करने लगेंगी.

क़ानून के राज्यमंत्री क़मरुल इस्लाम ने कहा कि सरकार की नीति इस्लाम का उल्लंघन नहीं करती. ये हड़ताल देश में उपद्रव फैलाने की राजनीतिक कोशिश है.

प्रमुख विपक्षी बांगलादेश नेशनलिंसट पार्टी ने इस हड़ताल का तो समर्थन नहीं किया लेकिन कहा कि वो सरकार की धर्म-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन करेगी.

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