बागबो के आत्मसमर्पण के लिए बातचीत जारी

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Image caption अलासान ओतारा के वफ़ादार सैनिक राष्ट्रपति बागबो के निवास को घेरे हुए हैं.

संयुक्तराष्ट्र का कहना है कि अफ़्रीक़ी देश आइवरी कोस्ट में राष्ट्रपति लॉरेंट बागबो के तीन वफ़ादार सैन्य कमांडर उनके आत्मसमर्पण की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं.

फ़्रांस का कहना है कि मध्यस्थता करने वाले लोग राष्ट्रपति बागबो को आत्मसमर्पण करने और देश छोड़कर चले जाने के लिए उन्हें राज़ी करने के बहुत क़रीब पहुंच गए हैं.

राष्ट्रपति बागबो अपने परिवार के साथ प्रमुख शहर आबिदजान में राष्ट्रपति निवास के तहख़ाने में बने बंकर में शरण लिए हुए हैं.

बागबो के प्रतिद्वंदी और संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति अलासान ओतारा के वफ़ादार सैनिकों का दावा है कि उन्होंने बागबो के परिसर को पूरी तरह घेर लिया है.

संयुक्तराष्ट्र के एक अधिकारी ने आबिदजान के क़रीब स्थित बीबीसी संवाददाता एन्ड्रयु हार्डिंग को बताया कि बागबो के सेना प्रमुख, उनके पुलिस प्रमुख और रिपब्लिकन गार्ड के प्रमुख ने बागबो के आत्मसमर्पण की बातचीत की शुरूआत की है.

'लड़ाई ख़त्म'

फ़्रांस के विदेश मंत्री एलेन जूप्पे ने पेरिस में राष्ट्रीय असेंबली में आइवरी कोस्ट के हालात की जानकारी देते हुए कहा कि वहां लड़ाई ख़त्म हो गई है.

उनका कहना था, ''हमलोग बागबो को सत्ता छोड़ने के लिए मनाने के बहुत क़रीब हैं.''

ओतारा के वफ़ादार सैनिकों के उपकमांडर सीसे सिंडो ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बीबीसी को बताया कि, ''हमने लड़ाई जीत ली है.बागबो फ़्रांसीसी अधिकारियों के क़ब्ज़े में है. वो देश छोड़ने की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं.''

बीबीसी संवाददाता एंन्ड्रयु हार्डिंग ने कहा कि बागबो के आत्मसमर्पण के लिए जारी बातचीत की ख़बरें बहुत तेज़ी से फैल रहीं हैं.

लेकिन इस ख़बर को लेकर लोगों में उत्साह कम और राहत का एहसास ज़्यादा है. लोग पूछ रहे हैं कि आख़िर बागबो ने उन्हें इस युद्द और तबाही में क्यों धकेला.

कई दिनों की लड़ाई के बाद 40 लाख की आबादी वाले आबिदजान शहर में कई लोग अपने घरों में बंद हैं. खाने पीने की चिज़ों , बिजली और पानी की ज़बर्दस्त कमी है.

पिछले साल नवंबर में संयुक्तराष्ट्र की देखरेख में हुए चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लॉरेंट बागबो चुनाव हार गए थे लेकिन विपक्ष पर चुनावों में अनियमितताएं बर्ते जाने का आरोप लगाकर वहां की संवैधानिक परिषद ने चुनावी नतीजे को रद्द कर दिया और राष्ट्रपति बागबो ने सत्ता छोड़ने से इनकार कर दिया.

लेकिन संयुक्तराष्ट्र, यूरोपीय संघ, अफ़्रीक़ी संघ और दूसरे कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अर्थशास्त्री रह चुके अलासान ओतारा को ही राष्ट्रपति स्वीकार किया और बागबो से सत्ता छोड़ने की अपील की लेकिन बागबो नहीं माने.

पिछले सप्ताह अलासान ओतारा के वफ़ादार सैनिकों ने बागबो की सेना के ख़िलाफ़ सैनिक अभियान शुरु कर दी जिसमें कई लोग मारे गए. अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस के मुताबिक़ पिछले एक सप्ताह में हुई हिंसा में कम से कम 800 लोग मारे गए है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आइवरी कोस्ट में जारी हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि अगर बागबो ने चुनावी नतीजों का सम्मान किया होता तो ये हिंसा टाली जा सकती थी.

उन्होंने कहा कि और ज़्यादा ख़ून ख़राबा रोकने के लिए बागबो को फ़ौरन सत्ता छोड़ देनी चाहिए.

सोमवार को संयुक्तराष्ट्र और फ़्रांसीसी हेलीकॉप्टरों ने बागबो के परिसर के ईर्द गिर्द कई ठिकानों पर हमले किए. संयुक्तराष्ट्र ने कहा है कि नागरिकों की जान बचाने के लिए ये हमले किए गए थे.

उधर अलासान ओतारा के एक प्रवक्ता पैट्रीक आची ने बीबीसी को बताया कि अगर बागबो पकड़े जाते हैं तो उन्हें गिरफ़्तार कर उनपर मुक़दमा चलाया जाएगा.

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