'भारत,चीन विकास के प्रमुख़ इंजन'

  • 6 अप्रैल 2011
एडीबी बैंक भारत

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के ताज़ा अनुमान के अनुसार भारत और चीन वैश्विक और एशियाई विकास को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहेंगें.

बैंक के मुताबिक़ चीन और भारत में आर्थिक मंदी के बावजूद आर्थिक स्थिरता के चलते एशिया के विकासशील देशों में अगले दो सालों तक आर्थिक विस्तार होगा.

लेकिन एडीबी के आंकड़ों के अनुसार साल 2011 में भारत और चीन के आर्थिक दर में गिरावट आएगी.

भारत में विकास दर साल 2010 के 8.6 के मुक़ाबले साल 2011 में गिरकर 8.2 होगी, तो चीन में विकास दर साल 2010 के 10.3 के मुक़ाबले 2011 में 9.6 होगा.

दिलचस्प बात ये है कि साल 2012 में जहां भारत की विकास दर बढ़कर 8.8 पर पहुंचेगी, वहीं चीन की विकास दर और ज़्यादा गिरकर 9.2 पर पहुंच जाएगी.

एडीबी की रिपोर्ट में लिखा है कि भारत में सख्त मौद्रिक नीति के बावजूद साल 2010 में अर्थव्यवस्था में मज़बूती आई है और 2011 में आर्थिक विकास दर में हल्की सी गिरावट के बावजूद अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रहेगी.

महंगाई पर चेतावनी

बढ़ती महंगाई को एडीबी ने एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बताया है.

बैंक का कहना है कि मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में जारी संघर्ष की वजह से तेल की क़ीमतों में आई बढ़त और जापान में आई भीषण तबाही के चलते समग्र विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

जहां तक चीन और भारत में महंगाई दर की बात है, तो एडीबी के अनुमान के अनुसार भारत की महंगाई दर 2011 और 2012 में लगातार घटेगी, लेकिन चीन में साल 2010 के आंकड़े के मुकाबले महंगाई दर में बढ़त देखने को मिलेगी.

एडीबी के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री राना हसन ने कहा, “महंगाई से निपटना आसान नहीं होगा लेकिन एशियाई क्षेत्र पूरे विश्व में आई मंदी से निपटने में सबसे आगे रहेगा. भारत पूरे विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहेगा.”

राना हसन का कहना था कि भारत में आर्थिक विकास दर में कमी आने के पीछे तेल की बढ़ती क़ीमतें, आरबीआई की सख्त मुद्रा नीति और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में कमी होना मुख्य कारण हैं.

लेकिन साथ ही उनका कहना था कि आरबीआई की सख्त मुद्रा नीति जायज़ है.

उनका कहना था कि भारत सरकार की रुढ़ीवादी नीतियों के चलते यहां विदेशी निवेश का वातावरण इतना अच्छा नहीं है. उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय की ‘सख्त नीतियों’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले दो सालों में सरकारी नीतियों में सुधार आएगा.

एडीबी का कहना है कि महंगाई को रोकने के लिए एशियाई प्रशासन को पुख़्ता कदम उठाने होंगें.

जापान का प्रभाव

पूरे एशिया क्षेत्र की बात की जाए तो एडीबी के अनुमान के अनुसार अगले दो सालों में जापान को छोड़ कर, एशिया की विकास दर आठ प्रतिशत के आसपास रहेगी.

जापान की अर्थव्यवस्था के बारे में एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री चेग्यॉंग री का कहना था कि कुछ देर के लिए आई बाधाओं के बावजूद उन्हें उम्मीद है कि जापान के भूकंप का कुल मिलाकर एशिया पर न्यूनतम प्रभाव ही होगा.

उन्होंने ये भी कहा कि जापान में पुनर्निर्माण का काम शुरु होने पर वहां ज़रुरतें बढ़ेंगी, जिसका लाभ दूसरे देशों को होगा.

एडीबी के अनुसार जापान को छोड़कर, एशियाई अर्थव्यवस्था 2010 के नौ प्रतिशत के विकास दर के मुकाबले में 2011 में कुल मिलाकर 7.8 प्रतिशत की दर से और वर्ष 2012 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी.

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