ऑस्ट्रेलिया में धूम्रपान हुआ मुश्किल

  • 7 अप्रैल 2011
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ऑस्ट्रेलिया ने धूम्रपान रोकने के लिए कड़े क़दम उठाए हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये दुनिया भर में धूम्रपान रोकने वाले क़ानूनों में सबसे सख़्त हैं.

इन नए क़दमों के तहत बाज़ार में उपलब्ध सिगरेट के पैकटों पर न तो प्रतीक चिह्न लगेंगे और न ही कंपनियों के इश्तिहार लग सकेंगे.

दुनियाभर में धूम्रपान के ख़िलाफ़ छिड़ी मुहिम के बीच ऑस्ट्रेलिया इस तरह के कड़े क़दम उठाने वाला पहला देश बन गया है.

इस नए क़ानून के मुताबिक़ सिगरेट पैकटों को अब जैतून जैसे हरे रंग में ही होना अनिवार्य है. इस हरे रंग को इसलिए चुना गया है क्योंकि आमतौर पर धूम्रपान करने वाले इस रंग की ओर आकर्षित नहीं होते.

हालांकि तंबाकू कंपनियों का कहना है कि वे एक क़ानूनी पदार्थ बेचते रहे हैं और इस तरह के नए नियम ट्रेडमार्क से संबंधित अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अवेहलना है.

हरे रंग का महत्त्व

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ऑस्ट्रेलिया की सरकार और सिगरेट निर्माता कंपनियों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में जैतून जैसे हरे रंग का प्रयोग एक नया औज़ार बताया जा रहा है.

दुनिया में अब तक से सबसे कड़े बताए जा रहे इस क़ानून के तहत ऑस्ट्रेलिया में बिकने वाले हर सिगरेट के पैकेट का इस रंग में होना अनिवार्य होगा.

हाल ही में हुए शोध में इस बात एक संकेत मिले हैं कि ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश सिगरेट पीने वाले जैतून जैसे हरे रंग से घृणा करते हैं.

इस नए क़ानून के तहत सिगरेट निर्माता कंपनियों का नाम भी अब इन पैकटों पर बहुत छोटे आकार में ही रहेगा जिसे पढ़ा जाना भी मुश्किल बताया जा रहा है.

दुनिया भर में इस तरह के सख़्त क़दम शायद पहली बार उठाने वाली ऑस्ट्रेलिया की सरकार के मुताबिक़ वो सिगरेट पीने से जुडी हुई सभी खुशफहमियों को ख़त्म करना चाहती है जिससे धूम्रपान में गिरावट आए.

हालाँकि बड़ी तंबाकू उत्पादक कंपनियों ने इस क़ानून की आलोचना की है और कहा है कि वे इसके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे.

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