सीरिया में हिंसक आंदोलन, 23 लोगों की मौत

  • 9 अप्रैल 2011
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Image caption डेरा में जूमे की नमाज़ के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन

सीरिया के दक्षिणी शहर डेरा में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़पों मे कम से कम 23 आंदोलनकारियों की मौत हो गई है.

अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक़ होम्स, डूमा, और हर्साता जैसे दूसरे इलाक़ों में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं और वहां भी कई लोग मारे गए हैं.

लेकिन इसके ठीक विपरीत राज्य नियंत्रित सीरियाई टीवी का कहना है कि डेरा में हथियार गुटों ने 19 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला है.पिछले मार्च में जबसे सीरिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए तब से डेरा शहर सरकार विरोधी आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र रहा है.

'बशर की मुश्किल'

इन प्रदर्शनों ने पिछले 11 साल से सत्ता पर क़ाबिज़ राष्ट्रपति बशर अल असद के लिए बहुत बड़ी चुनौती खड़ा कर दिया है.राष्ट्रपति बशर ने कुछ राजनीतिक सुधार का आश्वासन भी दिया था लेकिन आंदोलनकारियों का मानना है कि बशर अल असद के प्रस्तावों में कुछ ख़ास दम नहीं है.

डेरा शहर में शुक्रवार को जूमे की नमाज़ के बाद हज़ारों लोगों ने रैलियों में हिस्सा लिया.

डेरा के एक कार्यकर्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को टेलिफ़ोन के ज़रिए बताया कि तीन मस्जिदों से निकलकर आंदोलनकारी शहर के मुख्य चौराहे की ओर जा रहे थे तभी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका और आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.

एक दूसरे प्रदर्शनकारी ने बीबीसी को बताया कि जूमें की नमाज़ के बाद हर आदमी शहर के मुख्य चौराहे की तरफ़ चल पड़ा था. सुरक्षाबलों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया और उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दी.इसमें 13 लोगों की मौत हो गई. पहले हमलोग कुछ आज़ादी की मांग कर रहे थे लेकिन अब हर आदमी पूरे व्यवस्था में बदलाव चाहता है.

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Image caption क़मीशी शहर में भी कुर्दो ने सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

समाचार एजेंसी रायटर्स के हवाले से मिली ख़बर के अनुसार डेरा के महाटा इलाक़े के रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उसने तीन शवों और चारों तरफ़ ख़ून देखा है.

सरकारी टीवी चैनल ने कहा है कि ,''षडयंत्रकारियों ने डेरा में फ़ायरिंग की जिसमें 19 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 75 घायल हुए.''

'व्यापक प्रदर्शन'

क़मीशी, हसाखे, इडलीब, बनयास, हमा और होम्स जैसे दूसरे शहरों से भी प्रदर्शन की ख़बरें मिल रही हैं.

बीबीसी संवाददाता ने बताया कि दमिश्क़ के क़रीब डूमा शहर को सील कर दिया गया है इंटरनेट और मोबाईल फ़ोन पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

दमिश्क़ मे बीबीसी संवाददाता लीना सिंजाब ने बताया कि सीरिया के कई शहरों में प्रदर्शनकारी ज़्यादा आज़ादी की मांग कर रहे थे लेकिन डेरा में प्रदर्शनकारियों की मौत की ख़बर सुनने के बाद वो सत्ता परिवर्तन की मांग करने लगे.

लीना के अनुसार लोगों में इस बात को लेकर काफ़ी रोष है कि राष्ट्रपति बशर अल असद ने अब तक कोई सुधार नहीं लागू किए हैं. अब डर इस बात का है कि और ख़ून ख़राबा होगा.

आंदोलनकारियों के मुताबिक़ पिछले चार हफ़्तों में हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 130 लोग मारे गए हैं.

लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अब तक सिर्फ़ 30 लोग मारे गए हैं और इसके लिए भी वो हथियार बंद गुटों और विदेशियों को ज़िम्मेदार मानते हैं जो सीरिया को बांटना चाहते हैं.

ट्यूनीशिया और मिस्र में सरकार के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शन और वहां सत्ता परिवर्तन के बाद पूरे मध्य पूर्व और उतरी अफ़्रीक़ा में लोकतंत्र की जो हवा बह रही है सीरिया भी उन देशो में से एक है.

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