परिवार ने खाया ज़हर, चार की मौत

  • 12 अप्रैल 2011
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Image caption हादसे से पहले की तस्वीर

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी भिलाई में पिछले सात अप्रैल से ख़ुद को घर में बंद रखने वाले एक परिवार के सभी पांच सदस्यों ने मंगलवार को ज़हर खा लिया.

इनमें से चार की मौत हो हो गई है जबकि घर का एकमात्र पुरुष सदस्य गंभीर अवस्था में अस्पताल में ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रहा है.

ये लोग संयंत्र में काम करने वाले परिवार के मुखिया की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी और आवास की मांग कर रहे थे.

अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे सुनील के पिता एमएल साहू भिलाई इस्पात संयंत्र में अधिकारी थे और वर्ष 1995 में उनकी संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी.

भिलाई इस्पात संयंत्र का कहना है कि उन्होंने आत्महत्या की थी जबकि परिवार का आरोप है कि उनकी हत्या की गई थी. इस संबंध में परिवार ने कई सबूत होने का दावा भी किया था.

घटना

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Image caption हादसे में जीवित बजे सुनील साहू

अभी तक मिल रही जानकारी के अनुसार नौकरी की मांग कर रहे परिवार ने सात अप्रैल से खुद को घर में बंद कर रखा था और मंगलवार की सुबह इन लोगों ने ज़हर खा लिया.

इस घटना में मां और तीन बेटियों रेखा, शोभा और शीला की मौत हो गई जबकि घर का बड़ा लड़का सुनील साहू गंभीर अवस्था में नेहरु अस्पताल में दाखिल है.

इन लोगों ने ख़ुद को घर के अंदर तब बंद किया था जब इस्पात संयंत्र की तरफ़ से उन्हें मकान खाली करने का आदेश दिया गया था और प्रबंधन ने घर की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी थी.

परिवार ने धमकी दी थी कि अगर कोई ज़बर्दस्ती उनके घर में घुसने की कोशिश करेगा तो सभी लोग ख़ुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा लेंगे.

सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने नौकरी की मांग कर रहे परिवार को समझाने की काफ़ी कोशिश की थी मगर सुनील साहू का परिवार अपनी मांग पर अड़ा हुआ था.

संयंत्र का दावा

इस्पात संयंत्र के सूत्रों का कहना है कि सोमवार को कंपनी के उप महाप्रबंधक एके कायल एक दल के साथ परिवार से मिलने पहुंचे और उन्होंने आश्वासन दिया कि छह महीने तक परिवार सरकारी आवास में रह सकता है.

लेकिन प्रबंधन ने नौकरी देने की मांग को मानने से इनकार कर दिया. प्रबंधन का दावा है कि सुनील के घर में बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई थी.

भिलाई के भट्टी थाने की प्रभारी वैजयंतीमाला तिग्गा का कहना है कि, ''प्रबंधन के आश्वासन के बाद सुनील साहू ने मंगलवार को अपना आंदोलन समाप्त करने की बात कही थी."

उधर, जन कल्याण समिति की ममता शर्मा ने भिलाई के पुलिस अधीक्षक को सुनील के पिता एम एल साहू की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को फिर से खुलवाने और उसकी जांच करने का आवेदन किया है.

गृह मंत्री का बयान

घटना के बाद राज्य के गृह मंत्री ननकीराम कंवर एक बार फिर हरकत में आए.

बीबीसी के पूछे जाने पर उनका कहना था कि उनको किसी ने बताया ही नहीं कि सुनील का परिवार आरोप लगा रहा है कि उनके पिता की हत्या हुई थी.

वो मामले की जांच की बात कर रहे हैं. हालांकि गृह मंत्री से जब ये पूछा गया कि इतने दिनों तक परिवार ने खुद को घर में रखा था तो प्रशासन क्या कर रहा था. इस सवाल का गृह मंत्री के पास कोई जवाब नहीं था.

घटना को लेकर सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता सरकार और भिलाई प्रबंधन की आलोचना कर रहे हैं.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में सरकार और भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंधन का रवैया ग़ैर जि़म्मेदाराना रहा है.

सरकार और प्रशासन को सुनील साहू के परिवार से बात करनी चाहिए थी.

कुछ लोगों ने ये आरोप भी लगाया है कि गृह मंत्री ननकीराम कंवर के कथित बयान कि, ''परिवार ब्लैक मेल कर रहा है'' ने आग में घी का काम किया है.

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