फ्रांस में बुर्क़े पर पाबंदी,दो महिलाए गिरफ्तार

  • 12 अप्रैल 2011

फ्रांस में पूलिस ने बुर्क़ा पर पांबदी से जुड़े क़ानून का उल्लघंन करने के संबंध में दो महिलाओं को गिरफ़्तार किया है .

पूलिस ने फ्रांस की राजधानी पेरीस में स्थित नोर्टे डेम कैथेडरल के बाहर हो रहे एक छोटे प्रदर्शन में भाग ले रही दो महिलाओं को गिरफ़्तार कर लिया है.

इन दोनों महिलाओं ने अपने चेहरे बुर्क़े से ढ़के हुए थे.इनमें से एक महिला ने पूरे शरीर तक बुर्क़ा पहना हुआ था.

फ्रांस में सार्वजनिक जीवन में मुसलमान महिला के नक़ाब या बुर्के़ पहनने पर पांबदी लगाई गई है और ये क़ानून आज ही से वहां लागू हुआ है.

अब फ़्रांस में सार्वजनिक जीवन में अब कोई भी मुसलमान महिला नक़ाब या बुर्क़े पहनकर बाहर नहीं निकल सकेगी और ऐसा करने पर जुर्माना लगेगा. लंबी बहस के बाद ये क़ानून अब लागू हो गया है.फ्रांस में करीब 60 लाख मुसलमान हैं यानी कुल आबादी का 10 फ़ीसदी हिस्सा.

महिलाओं के बुर्क़ा पहनने को लेकर या कहें कि धार्मिक चिन्ह पहनने को लेकर फ़्रांस में बहस कोई नहीं है. पिछले कुछ सालों से इन मुद्दों को लेकर चर्चा गर्म है.फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने दो साल पहले बयान दिया था महिलाओं को ढँकने वाला बुर्का ग़ुलामी का प्रतीक है और उनकी गरिमा की अनदेखी करता है.

पिछले साल ऐसा किस्सा भी सामने आया था जब फ़्रांस की सरकार ने एक विदेशी व्यक्ति को नागरिकता देने से इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि उसने अपनी 'पत्नी को बुर्क़ा पहनने के लिए मजबूर किया.'

बहस केवल मुसलमानों के बुर्के़ तक ही सीमित नहीं है. फ़्रांस के स्कूलों में सभी धार्मिक चिन्हों के पहनने पर पाबंदी है. इसमें सिख धर्म में पहनी जाने वाली पगड़ी भी शामिल है.

2005 में फ़्रांस में तीन सिख छात्रों को एक स्कूल से निकालने का आदेश भी दिया गया था क्योंकि वे पटका पहनकर आते थे.

फ़्रांस में ये आदेश भी आ चुका है कि सिखों को ड्राइविंग लाइसेंस और परिचय पत्र के लिए बिना पगड़ी के तस्वीर खिंचवानी पड़ेगी.

बांग्लादेश-बुर्क़ा बाध्य नहीं

फ्रांस के अलावा यूरोप के अन्य देशों में बुर्क़े को लेकर ही नहीं इस्लाम को लेकर भी बहस तेज़ हुई है.

स्विट्ज़रलैंड में 2009 में लोगों ने मतदान कर इस बात का समर्थन किया था कि वहाँ मीनारों का निर्माण नहीं होना चाहिए. वहाँ करीब चार लाख मुसलमान हैं और केवल तीन मीनारे हैं.

इसी साल फ़रवरी में जर्मनी के एक प्रांत ने जनता से सीधे संपर्क रखने वाली सरकारी कर्मचारियों के बुर्क़ा पहनने पर रोक लगाई है.

आदेश है कि कोई भी सिविल सेवा अधिकारी, जो सीधे जनता से संपर्क में आती हैं, उन्हें बुर्क़ा पहनने की अनुमति नहीं होगी.जर्मनी के अन्य हिस्सों में इस पर पाबंदी लगाने पर विचार किया जा रहा है.

उधर स्पेन के शहर बार्सिलोना में सार्वजनिक उपयोग में आने वाली इमारतों में पूरे चेहरे को ढँकने वाले बुर्क़े पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

यह प्रतिबंध म्यूनिसिपल कार्यालय, बाज़ार और लाइब्रेरी आदि जगहों पर लागू है.

वहीं बेल्जियम के संसद में ऐसा विधेयक पारित हो चुका है, नीदरलैंड्स में भी कुछ पार्टियों ने ऐसे प्रतिबंध का समर्थन किया है. जबकि इटली की राइट विंग पार्टी भी ऐसी माँग करती रही है.

अगर मुस्लिम बहुल आबादी वाले देशों की बात करें तो बांग्लादेश में पिछले अगस्त में दिलचस्प मामला आया था. वहाँ अदालत ने निर्देश दिया है कि किसी महिला को शिक्षण संस्थानों या दफ़्तरों में बुर्का पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

दुविधा

वहीं सऊदी अरब के एक धार्मिक चैनल अवतान टीवी ने नियम बनाया हुआ है कि महिला एंकर नकाब पहनें .जब महिलाएँ कार्यक्रम पेश कर रही होती हैं तो स्टूडियों में पुरुष तकनीकी कर्मचारियों को घुसने की इजाज़त नहीं होती है.

बुर्क़े को लेकर अलग-अलग दुविधाएँ सामने आती रही हैं. पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के एक जज के सामने जब धोखाधड़ी का एक मामला आया तो उन्होंने आदेश दिया कि मुस्लिम महिला गवाही देने के लिए अपने चेहरे से नक़ाब हटाएँ. जज का कहना था कि ये उचित नहीं होगा कि गवाह का चेहरा ढका रहे.

ईरान में भी बुर्क़े को लेकर दिलचस्प किस्सा हो चुका है. दरअसल ईरानी लड़कियों की फ़़ुटबॉल टीम को युवा ओलंपिक खेलों में भाग लेना थे लेकिन उसका कहना था कि वे हिजाब पहनकर खेलेंगी जिस पर फ़ीफ़ा राज़ी नहीं था.

बाद में फ़ीफा ने बालों को पूरी तरह से ढकने वाले हिजाब के स्थान पर सिर को ढकने वाले एक विशेष कैप की पेशकश की ताकि बीच का रास्ता निकल सके.

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