बुर्क़ा क़ानून के तहत दो गिरफ़्तार

फ्रांस में पुलिस ने बुर्क़ा पर पांबदी से जुड़े़ क़ानून का उल्लघंन करने के आरोप में दो महिलाओं को गिरफ़्तार किया है .

पुलिस ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित नोर्टे डेम कैथेड्रल के बाहर हो रहे एक छोटे प्रदर्शन में भाग ले रही दो महिलाओं को गिरफ़्तार किया है.

इन दोनों महिलाओं ने अपने चेहरे बुर्क़े से ढके हुए थे.इनमें से एक महिला ने पूरे शरीर तक बुर्क़ा पहना हुआ था.

फ़्रांस में सोमवार को ही नया क़ानून लागू हुआ है जिसके तहत सार्वजनिक जीवन में कोई भी मुसलमान महिला नक़ाब या बुर्क़े के पीछे अपना चेहरा नहीं छुपा सकती. ऐसा करना जुर्म माना जाएगा.

अगर कोई भी इस क़ानून को तोड़ता है तो उस पर 150 यूरो का जुर्माना लगाया जा सकता है और उसे नागरिकता में अनिवार्य कोर्स करना पड़ेगा.

नए क़ानून में ये प्रावधान भी है कि अगर कोई किसी महिला को बुर्क़ा या नक़ाब पहनने के लिए मजबूर करता है तो उस पर बड़ा जुर्माना लग सकता है और दस साल तक जेल हो सकती है.

अब फ़्रांस में अगर कोई भी महिला- विदेशी या फ़्रांसीसी- नकाब या बुर्क़ा पहनकर घर से बाहर निकलती है तो पुलिस उसे रोककर उसपर जुर्माना लगा सकती है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये जुर्माना भले ही ज़्यादा नहीं होगा लेकिन सांकेतिक रूप से ये एक बड़ा बदलाव है.

फ़्रांस यूरोप का पहला देश है जिसने एक ऐसे विशेष लिबास के पहनने पर रोक लगाई है जिसे कुछ मुसलमान पहनना ज़रूरी मानते हैं.

फ़्रांस सरकार का कहना है कि चेहरे को ढकने वाला नक़ाब या बुर्क़ा उन मूल मानकों के ख़िलाफ़ है जो समाज में साझा तौर पर रहने के लिए ज़रूरी होते हैं.

प्रतिबंध ज़रूरी ?

सरकार के मुताबिक फ्रांस में सबको समान अधिकार है लेकिन ऐसे लिबास महिलाओं को तुच्छ दर्जा देते हुए नज़र आते हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़्रांस में ज़्यादातर लोग इससे सहमत हैं जिसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है.

संवाददाता के मुताबिक कुछ लोग विरोध कर सकते हैं लेकिन इससे फ़ैसले पर असर पड़ने वाला नहीं है.

यहाँ जो बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है वो ये है कि जब फ़्रांस में केवल करीब दो हज़ार महिलाएँ ही नक़ाब या बुर्क़ा पहनती हैं तो ऐसे में इस परिधान के पहनने पर क़ानूनी प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत थी या नहीं.

फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी के आलोचकों का कहना है कि मुसलमानों से जुड़े इस सवाल को उछालना राष्ट्रपति के राजनीतिक हितों को साधता है क्योंकि इस समय वे लोकप्रियता खो चुके हैं और उन्हें ऐसे मुद्दों की ज़रूरत है जो वोट दिला सकें.

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