इतिहास के पन्नों से : देवेगौड़ा हारे विश्वास मत

  • 11 अप्रैल 2011
एच डी देवेगौड़ा
Image caption दस महीने तक प्रधानमंत्री रहे देवेगौड़ा

ग्यारह अप्रैल, 1997 में केंद्र में 10 महीने पुरानी एच डी देवेगौड़ा सरकार विश्वास प्रस्ताव हार गई थी. कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद अल्पमत में आई देवेगौड़ा सरकार के विश्वास मत के ख़िलाफ़ 292 सांसदों ने मतदान किया था जबकि 158 सदस्य इसके पक्ष में थे. छह संसद सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.

सीपीआई में विभाजन

1964 में 11 अप्रैल को ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दो हिस्सों में विभाजित हो गई थी. मूल पार्टी पहले की तरह ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कहलाई जबकि इससे टूट कर बनी दूसरी पार्टी का नाम कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) रखा गया. रूस और चीन के बीच साम्यवादी विचारधारा को लेकर जो मतभेद पैदा हुए थे उसी वजह से भारत में सीपीआई का विभाजन हुआ था.

हिटलर के सहयोगी के ख़िलाफ मुक़दमा

Image caption यहूदियों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का मुक़दमा

1961 में ग्यारह अप्रैल को ही नाज़ी युद्ध अपराध के लिए एडॉल्फ़ इचमन के ख़िलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई इसराइल में शुरू हुई थी. उनपर यहूदियों को मिटाने की हिटलर की योजना में मदद देने का आरोप था. इचमन को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध, यहूदियों के ख़िलाफ़ अपराध और युद्ध अपराध समेत 15 मामलों में आरोपी बनाया गया था.

झुंपा को मिला पुलित्ज़र

भारतीय मूल की अमरीकी लेखिका झुंपा लाहिरी को 11 अप्रैल 2000 को उनकी पहली रचना 'इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज़' के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी.

ये लघु कथाओं का संग्रह था. उनकी अन्य रचनाएं हैं 'द नेमसेक' और 'अनअकस्टम्ड अर्थ'.

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