'हिंसा शुरू न होने देने पर हो ज़ोर'

  • 11 अप्रैल 2011
विश्व बैंक मुख्यालय
Image caption विश्व बैंक ने अनुदान के लक्ष्यों में परिवर्तन का सुझाव दिया है.

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय अनुदान के व्यय के तरीकों में बड़े परिवर्तन का सुझाव दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार अनुदान का ज़ोर स्थिर नागरिक संस्थान बनाने पर होना चाहिए वरना स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर ख़र्चा व्यर्थ जाएगा.

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है अनुदान की व्यवस्था बदलने से हिंसा रोकी जा सकती है क्योंकि जो देश हिंसा से प्रभावित हैं वहां गरीबी भी अधिक है. ऐसे देशों में भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए भी कुछ नहीं किया गया है.

दुनिया की एक चौथाई आबादी हिंसाग्रस्त देशों में रहती है. रिपोर्ट कहती है कि ऐसे देशों में अनुदान का लक्ष्य स्थिर सरकारों का गठन होना चाहिए. यानि स्वास्थ्य और शिक्षा के बजाय ध्यान न्याय और पुलिस व्यवस्था को सुधारने पर होना चाहिए.

'हिंसा शुरू ना होने देने पर हो ज़ोर'

विश्व बैंक की रिपोर्ट का कहना है कि हालांकि 'मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स' न्याय सुधार का मुद्दा शामिल नहीं था लेकिन अब अगर अनुदान की दिशा को नहीं बदला गया तो ग़रीबी, सेहत और शिक्षा जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हो पाएंगे.

वर्तमान में हिंसा शुरू ना होने देने पर ख़र्च से अधिक हिंसा को रोकने पर ख़र्च किया जा रहा है और ऐसे में हिंसा रुक भी जाती है तो कुछ समय बाद दोबारा शुरू हो जाती है.

रिपोर्ट की लेखक सारा क्लिफ़ कहती हैं,"रिपोर्ट के ज़रिए सामने आए अधिकतर तथ्य नए नहीं हैं. ब्रिटेन पहले ही हिंसाग्रस्त देशों के लिए अपने अनुदान के लक्ष्यों की दिशा बदल रहा है. अगर अन्य देश भी यही करते हैं तो अनुदान के ख़र्च के तरीकों में मौलिक परिवर्तन आ सकता है. मिसाल की तौर पर अनुदान का व्यय अस्पतालों और स्कूलों पर करने की बजाय बेहतर पुलिस व्यवस्था पर किया जाए."

मिसाल की तौर पर हाल के समय हुए 90 फ़ीसदी गृहयुद्ध ऐसे मुल्क़ो में हुए हैं जहां तीस साल पहले भी ऐसी ही स्थिति थी.

रिपोर्ट में पाया गया कि दक्षिण अफ़्रीका और मध्य अफ़्रीका में हिंसा के दुष्चक्र को बहुत मुश्किल है. ग्वातेमाला में 1980 के दशक में हुए गृहयुद्ध के मुक़ाबले मौजूदा वक़्त दोगुना अधिक लोग अपराधियों के हाथों मारे जा रहे हैं.

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