डॉलर पर निर्भरता कम करने के संकेत

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तेज़ी से विकास कर रहे पाँच देशों के समूह (ब्रिक्स) ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रुप में अमरीकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने के संकेत दिए हैं.

पाँच देशों के नेताओं ने चीन के सानया शहर में हुए शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त बयान में दुनिया की अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने पर ज़ोर दिया है.

बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में “स्थिरता और निश्चितता के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली” बनाए जाने की ज़रूरत है.

ख़ामियाँ

बयान में कहा गया है कि पिछले दिनों दुनिया भर में फैली मंदी ने इस बात को साबित कर दिया है मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय व्यवस्था में ख़ामियाँ हैं.

ब्रिक्स देशों के नेताओं ने बदली हुई आर्थिक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

फ़िलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में अमरीका और पश्चिमी देशों की ज़्यादा महत्वपूर्ण भूमिका है.

लेकिन वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान जिस तरह अमरीका, यूरोप और जापान की अर्थव्यवस्थाओं को झटका लगा है उसके बाद ब्रिक्स देश अपनी भूमिका को बढ़ाना चाहते हैं.

बदलता शक्ति संतुलन

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस शिखर सम्मेलन में कहा, “आर्थिक संकट से उबरने की प्रक्रिया और उसकी स्थिरता ब्रिक्स देशों के आर्थिक प्रदर्शन पर निर्भर होगी”.

बैठक में ये भी तय किया गया कि मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका मे जारी लोकतंत्र समर्थक विद्रोह का निपटारा बल प्रयोग के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए.

ब्रिक्स देशों ने अपने बयान में कहा है कि देशों की संप्रभुता का आदर करने में यक़ीन करते हैं.

इस बैठक के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने भी समूह की सदस्यता हासिल की जिसके बाद 'ब्रिक' को 'ब्रिक्स' के नाम से जाना जाएगा.

अभी तक ब्रिक में चार सदस्य - ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे.

प्रभाव

दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ब्रिक्स में पाँच ऐसे देश हैं जिनमें दुनिया भर की 40 प्रतिशत आबादी रहती है.

और दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में इन देशों की साझा हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है.

बीजिंग से बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंश का कहना है कि यही वजह है कि ब्रिक्स समूह वैश्विक मामलों में अब बड़ी भूमिका चाहते हैं.

ये समूह पश्चिमी शक्तियों के मुक़ाबले में तैयार किया गया था लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ब्रिक्स समूह कितना प्रभावशाली बन पाएगा.

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