नैटो को और लड़ाकू विमान का वादा नहीं

  • 16 अप्रैल 2011
नैटो की बैठक इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption नैटो और लड़ाकू विमान जुटाने और ज़मीनी लड़ाई के लिए सहयोग जुटाने की कोशिश कर रहा है

नैटो के विदेश मंत्रियों की बैठक सदस्य देशों की ओर से लीबिया में और लड़ाकू विमान भेजने के वादे के बिना ख़त्म हो गई है.

नैटो के महासचिव फ़ाग़ रैसमुसेन ने कहा है कि जब तक कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता संभाल रहे हैं वहाँ के नागरिकों के ख़तरा बना रहेगा.

इस बीच विद्रोहियों के कब्ज़े वाले शहर मिसराता से ख़बर मिली है कि वहाँ लीबियाई सेना ने हमले तेज़ कर दिए हैं और दिन के वक़्त सौ से अधिक रॉकेट दागे हैं.

न्यूयॉर्क में ह्यमन राइट्स वॉच ने कहा है कि लीबियाई सेना की ओर से आबादी वाले इलाक़े में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित क्लस्टर बमों का प्रयोग किया जा रहा है.

कोई वादा नहीं

नैटो की बैठक जर्मनी के बर्लिन में बुलाई गई थी और इसका विषय था, लीबिया.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption मिसराता पर लीबियाई सैनिक रॉकेट दाग रहे हैं

लेकिन किसी भी सदस्य देश ने और लड़ाकू विमान भेजने का कोई वादा नहीं किया.

न तो अमरीका और न ही इटली ने ये संकेत दिए कि वे ज़मीनी लड़ाई में भागीदारी निभाएँगे.

फ़ाग़ रैसमुसेन का कहना है कि सदस्य देशों की ओर से ये संकेत ज़रुर मिले हैं कि लीबिया पर कार्रवाई के लिए अगर ज़रुरत हुई तो वे और लड़ाकू विमान उपलब्ध करवाएँगे.

उन्होंने कहा, "हमें संकेत मिले हैं कि सदस्य देश वो सब मुहैया करवाएँगे जिसकी ज़रुरत होगी...मैं आशा करता हूँ कि हमें निकट भविष्य में आवश्यक चीज़ें मिल जाएंगीं."

फ़िलहाल नैटो के 28 सदस्य देशों में से कुछ ही देश हवाई हमले कर रहे हैं, जिनमें फ़्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, बेल्जियम, नॉर्वे और डेनमार्क शामिल हैं.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जेम्स रॉबिन्स के अनुसार नैटो देशों के नेताओं का कहना है कि लीबियाई सेना पर हवाई हमलों से उन्होंने हज़ारों लोगों की जानें बचाई हैं लेकिन मिसराता में नागरिकों पर हो रहे हमलों ने हवाई हमलों की सीमा को भी उजागर किया है.

संयुक्त पत्र

उधर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के नेताओं ने एक संयुक्त पत्र में जो़र देकर कहा है कि जब तक कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता में है तब तक लीबिया में शांति बहाल नहीं हो सकती.

अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कैमरन और फ़्रांस के राष्ट्रपति सार्कोज़ी ने कई मुख्य अख़बारों को संयुक्त पत्र लिखा है कि लीबिया में नागरिकों को बचाना भर काफ़ी नहीं है और गद्दाफ़ी को जाना होगा.

तीनों नेताओं ने कहा है कि भले ही लीबिया में सैन्य अभियान को लेकर मतभेद हों लेकिन गद्दाफ़ी पर दवाब डालने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि नैटो का अभियान जारी रहे.

बीबीसी संवाददाता पॉल एड्स के मुताबिक इस तरह अख़बारों को पत्र लिखना कोई आम बात नहीं है.

टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और ल फ़िगरो अख़बार में प्रकाशित पत्र में तीनों नेताओं ने लिखा है कि मिस्राता और अजदाबिया जैसे शहरों में गद्दाफ़ी के कारण लोगों को तकलीफ़ झेलनी पड़ रही है.

इस संयुक्त चिट्ठी में लिखा है, “अगर गद्दाफ़ी को सत्ता में रहने दिया गया तो ये लीबियाई लोगों के साथ धोखा होगा. इससे लीबिया एक विफल देश बन जाएगा. नागरिकों की सुरक्षा के लिए नैटो का अभियान ज़रूरी है. तभी असल मायनों में तानाशाही की जगह एक संवैधानिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी.”

संबंधित समाचार