सीरिया में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन

  • 16 अप्रैल 2011
दमिश्क में प्रदर्शनकारी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption शुक्रवार के प्रदर्शनों को अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है

सीरिया की राजधानी दमिश्क के केंद्र की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं और लाठीचार्ज किया है.

शहर के बाहरी हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीयाँ दाग़े जाने की भी ख़बरें हैं.

शुक्रवार की नमाज़ के बाद सीरिया के कई शहरों में दसियों हज़ार लोगों ने प्रदर्शन किए हैं.

कहा जा रहा है कि एक महीने पहले सीरिया में प्रदर्शनों का दौर शुरु होने के बाद से ये सबसे बड़ा प्रदर्शन है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शनों में हुई झड़पों में दो सौ से अधिक लोग मारे गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि मारे गए लोगों में 30 से अधिक पुलिसकर्मी और सैनिक शामिल हैं.

प्रदर्शन

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Image caption सीरिया में सरकार के समर्थन में भी कुछ प्रदर्शन हुए हैं

वैसे तो राष्ट्रपति बशर अल-असद ने नई सरकार के गठन और बंदी बनाए गए प्रदर्शनकारियों का माफ़ी देने का वादा किया है लेकिन इससे सीरिया में प्रदर्शन रुक नहीं रहे हैं.

दमिश्क में ही शुक्रवार को हज़ारों लोगों ने शहर के केंद्र की ओर जाने की कोशिश की. उन पर सुरक्षाबलों ने लाठियाँ बरसाईं और आसूं गैस के गोले छोड़े.

दमिश्क के अलावा डेरा, लताकिया, बनयास, क़मिशली सहित कई शहरों में दसियों हज़ार लोगों ने प्रदर्शन किए हैं. ये वो शहर हैं जहाँ पहले प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएँ हो चुकी हैं.

दमिश्क शहर के बाहरी हिस्सों में हुए प्रदर्शनों को लोगों की नाराज़गी बढ़ने के संकेत के रुप में देखा जा रहा है.

सरकारी मीडिया का कहना है कि देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं और सुरक्षा बलों ने उसमें कोई बाधा नहीं डाली है.

मांगें

राष्ट्रपति बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता के बाद सत्ता संभाली थी.

इन प्रदर्शनों को उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती के रुप में देखा जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे और अधिक आज़ादी चाहते हैं जिसमें उस क़ानून को ख़त्म करना शामिल है जिसके तहत पाँच से अधिक व्यक्ति एक जगह एकत्रित नहीं हो सकते और विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते.

समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पीला कार्ड लिए हुए थे और राष्ट्रपति असद को चेतावनी दे रहे थे. ठीक उसी तरह जिस तरह फ़ुटबॉल में रेफ़री देता है.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "ये राष्ट्रपति असद को हमारी पहली चेतावनी है इसलिए हम पीला कार्य दिखा रहे हैं अगली बार हम लाल कार्ड लेकर आएंगे."

एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि प्रदर्शनकारी रास्त में जहाँ भी राष्ट्रपति असद का पोस्टर मिला उसे फाड़ते चल रहे थे और चेतावनी दे रहे थे कि वे उन्हें सत्ता से हटाकर रहेंगे.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने सीरिया सरकार से अपील की है कि वे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग बंद करें.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सीरिया सरकार से कहा है कि वह अपने लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा का प्रयोग न करे.

बर्लिन में नैटो की बैठक के बाद उन्होंने कहा, "सीरिया की सरकार ने लोगों की वैधानिक मांगों पर ध्यान नहीं दिया है."

उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है जब सीरिया की सरकार को अपने नागरिकों को कुचलना बंद करे और उनकी मांगों पर कार्रवाई करना शुरु करे."

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है जिनमें विपक्षी दल के नेता, ब्लॉगर्स और कार्यकर्ता शामिल हैं.

ट्यूनीशिया और मिस्र में सरकार के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शन और वहां सत्ता परिवर्तन के बाद पूरे मध्य पूर्व और उतरी अफ़्रीक़ा में लोकतंत्र की जो हवा बह रही है सीरिया भी उन देशो में से एक है.

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