दुनिया आर्थिक संकट से 'कदम भर दूर'

रॉबर्ट ज़ॉलिक
Image caption विश्व बैंक के मुताबिक़ पिछले एक साल में करीब साढ़े चार करोड़ लोग ग़रीबी के चंगुल में जा चुके हैं

विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉएलिक ने चेतावनी दी है कि खाने की चीज़ों की बढ़ती क़ीमतें विश्व भर में ग़रीबों के लिए एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही हैं.

ज़ॉएलिक का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण पूरा विश्व एक बड़े संकट के बहुत क़रीब आ चुका है.

वाशिंगटन में दुनिया की बीस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के वित्त क्षेत्र के प्रमुखों की बैठक के समापन के बाद रॉबर्ट ज़ॉएलिक ने कहा कि पिछले एक साल में करीब साढ़े चार करोड़ लोग ग़रीबी के चंगुल में धकेले जा चुके हैं.

उन्होंने कहा, “विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बहुत ज़्यादा है. खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमते हमारी सबसे बड़ी चिंता हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी को खो देने का ख़तरा बना हुआ है. हम एक बड़े संकट से कुछ ही दूरी पर हैं. आर्थिक मंदी ने हमें सिखाया है कि उपचार से बेहतर बचाव कार्य होता है और हम इस सीख को भूल नहीं सकते. हमें डर है कि आने वाले समय में 1 करोड़ और लोग ग़रीबी की ओर धकेले जा सकते हैं.”

इस बैठक में बेरोज़गारी, बढ़ते तेल की क़ीमतें और मध्य-पूर्व में आए संकट जैसे मुद्दों को भी वैश्विक आर्थिक सुधार के समक्ष बड़ी चुनौतियां बताया गया.

बैठक में विश्व की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अध्यक्षों ने मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका की सरकारों को 35 बिलियन डॉलर का ऋण देने की घोषणा की है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ॉएलिक ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, “मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में पैदा हुआ संकट इस बात को रेखांकित करता है कि हमें अपनी विश्व विकास रिपोर्ट में दिए गए सुझावों का पालन करना होगा. इस रिपोर्ट में नागरिकों की सुरक्षा, न्याय और रोज़गार की महत्ता पर ज़ोर दिया गया है.”

खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों और बढ़ती बेरोज़गारी के चलते भी मिस्र और ट्यूनिशिया में स्थिति गंभीर हो गई थी.

विश्व बैंक ट्यूनिशिया में विकास और सुधार लाने के लिए कदम उठाने पर विचार कर रहा है.

गत गुरुवार अमरीका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने कहा था कि अगर अरब देशों की सरकार शासन प्रणाली में सुधार लाने को तैयार होती है, तो वे उन्हें वित्तीय मदद देने को तैयार हैं.

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