कार्डिनल रैत्सिंगर पोप चुने गए...

पोप बेनेडिक्ट (फ़ाईल फ़ोटो ) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पोप बेनेडिक्ट कुछ मुद्दों पर अपने विचारों के लिए काफ़ी परंपरावादी माने जाते हैं

उन्नीस अप्रैल का दिन इतिहास में कई कारणों से अहम है.

उन्नीस अप्रैल 2005 को ही कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर पोप चुने गए थे. पोप दुनिया भर के एक अरब से भी अधिक रोमन कैथोलिक ईसाईयों के धर्म गुरू होते हैं.

पोप जॉन पॉल द्वितीय के उत्तराधिकारी 78 साल के जोज़फ़ रैत्सिंगर जर्मनी से कार्डिनल रहे है और लगभग 20 साल तक पोप जॉन पॉल द्वितीय के काफ़ी क़रीबी रहे थे. उनको पोप बेनेडिक्ट 16 के नाम से जाना जाता है.

नए पोप का चुनाव चौथी बार मतदान के बाद संभव हो पाया क्योंकि पहले तीन बार मतदान के बाद नए पोप के बारे में फ़ैसला नहीं हो पाया था.

वे 265वें पोप हैं.

ज़्यादातर लोगों ने उनके पोप चुने जाने पर ख़ुशी जताई थी लेकिन कैथोलिक चर्च के कुछ उदारवादियों और आलोचकों ने आशंका जताई थी कि नए पोप के परंपरावादी विचारों की वजह से ध्रुवीकरण हो सकता है.

19 अप्रैल 1995-ओकलाहोमा बम विस्फोट

उन्नीस अप्रैल 1995 को अमरीका के ओकलाहोमा शहर में एक सरकारी बिल्ड़िंग में हुए बम धमाके में 19 बच्चे समेत कुल168 लोग मारे गए थे और 500 से ज़्यादा ज़ख्मी हो गए थे.

Image caption 9/11 हमले से पहले अमरीका की धरती पर यह सबसे बड़ी चरमपंथी घटना थी.

धमाका इतना भयानक था कि बचावकर्मियों को मलवे से शवों को निकालने में लगभग छह हफ़्ते लग गए थे.

ये धमाका एक कट्टरपंथी गुट डेविडियन पंथ के लोगों ने किया था. दो साल पहले 1993 में टेक्सास शहर मे डेविडियन पंथ के लोगों पर पुलिस कारर्वाई में अस्सी से ज़्यादा लोग मारे गए थे. इसी का बदला लेने के लिए इस पंथ के कुछ समर्थकों ने ओकलाहोमा बम धमाके किए थे.

तीन लोगों को इसके लिए दोषी पाया गया था जिसमें एक को मौत की सज़ा दी गई जबकि दूसरे को उम्र क़ैद और तीसरे को 12 साल की सज़ा दी गई थी.

19 अप्रैल 1972-ब्रिटिश सेना को क्लीन चिट

उन्नीस अप्रैल 1972 को जारी एक रिपोर्ट में ब्रितानी सेना को जनवरी 1972 मे उत्तरी आयरलैंड में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं पर गोलीबारी के लिए बरी कर दिया गया. तीस जनवरी 1972 को नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के एक जूलूस पर सेना ने गोली चलाई थी जिसमें 14 लोग मारे गए थे.

चीफ़ जस्टिस लॉर्ड विजरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सेना ने जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई थी जो कि जायज़ है. रिपोर्ट के मुताबिक़ लगभग 10 हज़ार की भीड़ सेना के ज़रिए खड़े किए गए अवरोध को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती थी.उनमें से कुछ के पास हथियार भी थे और उन्होंने पहले सेना पर फ़ायरिंग की. सेना ने इसके जवाब में आत्मरक्षा में गोलियां चलाई जिसमें 14 लोग मारे गए.

रिपोर्ट में हालाकि कुछ सैनिकों को गोली चलाते समय लापरवाही बरतने का दोषी क़रार दिया गया.

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