पुरानी दुश्मनी कुरेदती एक फ़िल्म !

  • 19 अप्रैल 2011
Image caption फिल्म बांग्लादेश की एक लड़की और पाकिस्तानी सेना के एक जवान के बीच प्रेम की कहानी है.

बांग्लादेश की रुबाइयत हुसैन ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उनकी बनाई पहली ही फ़िल्म इस क़दर विवादित हो जाएगी कि अख़बारों से लेकर इंटरनेट पर जंग छिड़ जाएगी.

‘मेहरजान’ नाम की यह फ़िल्म 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है. यह फिल्म बांग्लादेश (उस समय पूर्वी पाकिस्तान) की एक लड़की और पाकिस्तानी सेना के एक जवान के बीच प्रेम की कहानी है.

फिल्म रिलीज़ हुए अभी एक हफ़्ता भी नहीं हुआ कि मीडिया और इंटरनेट पर कड़े विरोध और आलोचना के बाद फ़िल्म को सभी सिनेमा हॉल से उतार दिया गया है.

आलोचकों का कहना है कि यह फ़िल्म इतिहास को ग़लत तरीक़े से पेश करती है.

'सच्चाई से परे'

युद्ध के 40 साल बाद भी बांग्लादेश इस युद्ध और उससे जुड़े इतिहास से ऊबर नहीं पाया है.

आधिकारिक आकलन है कि 'बांग्लादेश की इस आज़ादी की लड़ाई' के दौरान लगभग 30 लाख लोग मारे गए थे और दो लाख से ज़्यादा औरतों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं हुई थीं.

हालांकि फिल्म की निर्देशक रुबाइयत हुसैन नहीं मानतीं कि यह फ़िल्म युद्ध की भयावह सच्चाई से परे है.

वो कहती हैं, ''1971 के युद्ध को हमें एक नज़रिए से देखने की आदत है जिसमें बांग्लादेशी एक तरफ़ हैं और बर्बर पाकिस्तानी सैनिक दूसरी तरफ़. मैंने इस नज़रिए से अलग हटने की कोशिश की है और इसी बात से हंगामा हो रहा है.''

'दूसरा नज़रिया'

फिल्म का विरोध कर रही फिरदौसी प्रियभाषिनी कहती हैं, ''मैं बलात्कार की शिकार एक महिला हूं और मैंने बहुत दुख और ज़लालत सहे हैं. मैं फ़िल्म का विरोध कर रही हूं क्योंकि फ़िल्म में पाकिस्तानियों के लिए नरम दिल रवैया दिखता है.''

फ़िल्म की कहानी मेहर नाम की एक लड़की पर आधारित है जिसे युद्ध के दौरान एक पाकिस्तानी सिपाही से प्यार हो जाता है. हालांकि यह बात पता लगने पर उसे ज़लील किया जाता है और परिवार व समाज के दबाव में वह चुप हो जाती है.

रुबाइयत हुसैन का कहना है कि यह पूरी तरह फ़िल्मकार पर निर्भर करता है कि वह अपनी फ़िल्म में किस नज़रिए को दिखाना चाहता है और किस कहानी को चुनता है.

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