लुटेरों से निपटने की अंतरराष्ट्रीय मुहिम

  • 20 अप्रैल 2011
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समुद्री लुटेरों के बढ़ते ख़तरे पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा गया है कि इसे रोकने के लिए देशों और व्यापारिक कंपनियों के बीच मज़बूत गठजोड़ की ज़रुरत है.अमरीका से लेकर भारत तक कई देश इस समस्या से जूझ रहे हैं.

एंटी-पाइरेसी फ़ंड के लिए लाखों डॉलर इकट्ठा करने के लिए 50 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त अरब अमीरात में बैठक की है.

समुद्री लुटेरों का सबसा ज़्यादा ख़तरा सोमालिया से है. सम्मेलन में प्रतिनिधियों में सोमालिया को लेकर मतभेद भी थे.

कुछ देशों का कहना था कि पहले सोमालिया के आंतरिक कलह को सुलझाना होगा.

सोमालिया के विदेश मंत्री मोहम्मद अबदुलाही उमर ने आगाह किया है कि अगर विश्व के बाकी देश सोमालिया के साथ मिलकर काम नहीं करते हैं तो समुद्री लुटेरों से निपटना मुश्किल हो जाएगा.

बढ़ता ख़तरा

इसी साल संयुक्त राष्ट्र ने अपने अध्ययन में कहा था कि कि सोमालिया के समुद्री डाकुओं के ख़िलाफ़ ज़्यादा सुरक्षा क़दम उठाने की ज़रुरत है.

अनुमान के मुताबिक समुद्री डाकुओं की वजह से दुनिया को हर साल सात अरब डॉलर का घाटा उठाना पड़ता है.

भारत के कई नाविक समुद्री लुटेरों की गिरफ़्त में हैं. अभी हाल में इन जलदस्युओं को फिरौती भी दी गई लेकिन उन्होंने फिरौती लेने के बावजूद भारतीय बंधकों को नहीं छोड़ा है.

इंटरनेशनल मैरीटाइम ब्यूरो ने अपनी ग्लोबल पायरेसी रिपोर्ट में बताया है कि दुनियाभर में वर्ष 2010 में सबसे ज़्यादा लोगों को समुद्री डाकुओं ने अगवा किया है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र ने जनवरी 2010 में अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि सोमाली समुद्री डाकुओं ने 600 से ज़्यादा लोगों को पकड़ रखा है और 26 जहाज़ उनके कब्ज़े में है.

संयुक्त राष्ट्र के लिए अध्ययन करने वाले फ्रांस के पूर्व मंत्री जैक लैंग ने ये सुझाव दिया था कि सोमाली न्याय व्यवस्था के तहत अदालत का गठन किया जाना चाहिए जो कि विदेश में स्थित हो और साथ ही हिंद महासागर में सोमाली समुद्री लुटेरों के तटीय ठिकानों के पास नौसेना की गश्त तेज़ की जानी चाहिए.

वर्ष 2008 से अब तक सोमाली लुटेरों ने क़रीब दो हज़ार लोगों को अगुवा किया है और उनको 95 लाख डॉलर फिरौती के रुप में दिए गए हैं.

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