'समलैंगिक सुधार शिविर अवैध'

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मलेशिया की महिला मामलों की मंत्री ने कहा है कि 'स्त्रियोचित गुण' वाले छात्रों के लिए तैयार किया गया एक विशेष कैंप ग़ैर कानूनी है और इसे बंद किया जाए.

हाल ही में मलेशिया के अधिकारिंयो ने 66 स्कूली छात्रों में 'स्त्रियोचित गुण' पाए जाने के बाद उन्हें एक विशेष कैंप में 'उचित आचरण' सीखने के लिए भेज दिया था.

लेकिन देश में महिला मामलों की मंत्री शाहरीजा़त अब्दुल जलील का कहना है कि जिन छात्रों में 'स्त्रियोचित गुण' पाए गए हैं उन्हें इस तरह की प्रताड़ना देना ग़लत है और ये क़दम उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है.

शाहरीजात अब्दुल रजाली ने कहा, "इस तरह का शिविर चाइल्ड एक्ट की अवहेलना करता है".

मलेशिया में कुआला तेरेंगानू राज्य के शिक्षा विभाग के मुताबिक़ बेसूट में आयोजित इस चार दिन के शिविर में कक्षा 12 के छात्रों को इनकी दिक्कतों से निपटने में जानकारी दी जाएगी.

राज्य शिक्षा विभाग के निदेशक रज़ाली दाऊद ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया था, "पिछले साल कई स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि उन छात्रों को छांटा जाए जिनमे स्त्रियोचित गुण देखे गए हैं. सुधार वाले क़दम उठाने इसलिए भी ज़रूरी थे क्योंकि राज्य के स्कूलों में स्त्रियोचित गुण वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही थी."

रज़ाली दाउद के मुताबिक़ इन छात्रों में स्त्रियोचित गुण कई प्रकार के हैं लेकिन इन 66 लड़कों में कुछ ऐसा आचरण पाया गया जो इनकी उम्र के दौर में आमतौर से नहीं देखा या पाया जाता है. दाऊद का ये भी मानना है कि पुरुष वर्ग के छात्रों में स्त्रियोचित गुण और समलैंगिकता के प्रति उनका झुकाव चिंता का विषय है जिसे नज़रंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.

ज़िम्मेदार कौन?

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हालांकि मलेशिया के शिक्षा विभाग के लोगों ने इस तरह के शिविर को हरी झंडी देते हुए छात्रों के माता-पिताओं को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

चार दिनों के इस 'विशेष शिविर' में इन छात्रों को धर्म के ज्ञान के साथ साथ शारीरिक मार्गदर्शन देने की भी बात कही गई है.

हालांकि यौन अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता पांग नी टेइक ने इस तरह के 'विशेष शिविर' आयोजत करने की निंदा की है और इसे समलैंगिकों के प्रति दुर्भावना रखने वाला क़दम बताया है.

मलेशिया में समलैंगिता पर प्रतिबंध है और इस तरह का आचरण ग़ैरक़ानूनी है.

देश में समलैंगिकों का लगातार यही आरोप रहा है कि सरकार इन लोगों के साथ भेदभाव करती है और समलैंगिक गतिविधियों के लिए 20 साल कारावास की सज़ा का अमानवीय प्रावधान है.

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