रत्नागिरी में कड़ी सुरक्षा

मधुकर गायकवाड़
Image caption रत्नागिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड़ के मुताबिक़ स्थिति नियंत्रण में है

महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले के कलेक्टर मधुकर गायकवाड़ ने बीबीसी को बताया है कि 23 अप्रैल से शुरू होने वाले परमाणु ऊर्जा विरोधी मार्च को ज़िले में प्रवेश से रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.

उनका कहना है कि वो इस प्रस्तावित मार्च को रत्नागिरी ज़िले में प्रवेश नहीं करने देंगे.

तारापुर से शुरू होकर जैतापुर तक जाने वाले इस मार्च में देशभर से क़रीब 150 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं और समाजसेवकों के हिस्सा लेने की उम्मीद है.

मार्च करने वालों में प्रफ़ुल बिदवई, बनवारी लाल शर्मा, वंदना शिवा, अनिल सदगोपाल, आनंद पटवर्धन औऱ डुनू रॉय शामिल होंगे.

इस मार्च के आयोजक राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा विरोधी यात्रा संयोजन में शामिल संस्था 'कोंकण विनाशकारी प्रकल्प विरोधी समिति' के सत्यजीत चव्हाण ने बीबीसी को बताया था कि संयंत्र के प्रस्ताव को निरस्त कर देना चाहिए क्योंकि इलाके में भूकंप की आशंका बहुत अधिक है.

परमाणु ऊर्जा के विरोध में यात्रा

ये मार्च 25 अप्रैल को जैतापुर में ख़त्म होना है. रास्ते में कई जगहों पर सभाओं का कार्यक्रम है जिनमें परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न होने वाले ख़तरों के बारे में लोगों को बताया जाएगा.

ये पूछे जाने पर कि क्या तारापुर के अधिकारियों से उनकी बात हुई है और क्या ये मार्च वहाँ से शुरू हो भी पाएगा, रत्नागिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड़ ने कहा कि इसकी व्यवस्था कर ली गई है.

मधुकर गायकवाड़ ने कहा, "इस बारे में मैं इतना ही कह सकूँगा कि कोंकण रेंज के आईजी परमवीर सिंह बाकी ज़िलों से समन्वय करके मार्च रोकने के लिए ज़रूरी आदेश निकाल रहे हैं."

पूछे जाने पर कि क्या इस आदेश को लोगों को अपनी बात रखने से रोकने के तौर पर नहीं देखा जाएगा, गायकवाड ने कहा, "ऐसा नहीं है. हमने उनसे कई बार बात की है, दस-बारह बार मीटिंग की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री खु़द लोगों से बात करने उनके गाँव में आए थे. उन्होंने मुंबई में भी इस विषय पर चर्चा की थी, तो इसमें रोकने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. यहाँ की स्थिति को देखते हुए हमने ये आदेश दिए हैं."

पुलिस फा़यरिंग

गौरतलब है कि हाल ही में जैतापुर में हुए एक प्रदर्शन में पुलिस की गोली से तबरेज़ नाम के एक स्थानीय युवक की मौत हो गई थी.

जब बीबीसी ने मधुकर गायकवाड़ से पूछा कि क्या पुलिस फ़ायरिंग में तबरेज़ की मौत की घटना को रोका जा सकता था और क्या पुलिस हवा में फ़ायरिंग भी कर सकती थी, उसपर उनका सीधा जवाब नहीं मिल सका.

गायकवाड ने कहा, "मैं इतना ही कहूँगा कि इस बारे में मैजेस्टीरियल इन्क्वायरी ऑर्डर हुई है. उस जाँच के आधार पर ये साबित होगा कि गोली कैसे चलाई गई. इस जाँच का नतीजा जल्द से जल्द आएगा."

प्रस्ताविक 9900 मेगावाट जैतापुर परमाणु संयंत्र के पास रहने वाले लोग इसके ख़िलाफ़ हैं.

हालांकि इसे पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन जापान में आए सूनामी और भूकंप की वजह से परमाणु संयंत्रों की हालत के बाद भारत में इन संयंत्रों को लेकर बहस तेज़ हुई है.

ये संयंत्र सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड फ़्रांस की कंपनी अरेवा के सहयोग से बना रही है.

कहा जा रहा है कि पूरा हो जाने पर ये एशिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा.

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