अत्याधुनिक तकनीक के ज़रिए 'जिहाद'

  • 22 अप्रैल 2011
Image caption इंटरनेट पर फ़ोटोशॉप में तैयार की 9/11 हमले की कई तस्वीरें मौजूद हैं.

ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जुड़ने और अपने गतिविधियों को बढ़ाने के लिए चरमपंथी गुट अब अत्याधुनिक तकनीक और स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

जिहादी गुटों की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों पर किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि ये गुट अपनी जानकारियां इकट्ठा करने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने के लिए कई तरह के 'सॉफ़्टवेयर' का इस्तेमाल करते हैं.

इन गुटों के पास कई तरह के वीडियो, गाने, भाषण और तस्वीरें होती हैं जिन्हें वो अक्सर नई रुपरेखा में ढालकर अपने प्रशंसकों और अनुयायियों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

जर्मनी के शोधकर्ता निको प्रूशा ने सात साल तक जिहादियों की ओर से इंटरनेट पर डाली गई सामग्री का विश्लेषण और विवेचन किया.

प्रूशा का कहना है कि वेब कैमरों, मोबाइल फ़ोन और ‘ब्लू-टूथ’ जैसी तकनीकों के अभाव में अल-क़ायदा जैसे चरमपंथी संगठन बहुत पहले ख़त्म हो चुके होते.

'पेशेवर ढंग से तैयार की जाती है'

प्रूशा कहते हैं, ''अगर यह नई से नई तकनीकें नहीं होतीं तो 1980 की तरह अल-क़ायदा अब भी एक गुमनाम संगठन होता.''

उनका कहना है कि अत्याधुनिक तकनीकों के ज़रिए इन जानकारियों के एक से कई प्रारुप बनाए जा सकते हैं और इसके बावजूद उनकी गुणवत्ता बरक़रार रहती है.

यहां तक की जिहादी संगठनों की कुछ इकाईयां इन वीडियो, तस्वीरों और ऑडियो के टुकड़ों को बनाने और संपादित करने का काम करती हैं.

इस तरह की सामग्री के साथ संबंधित गुट का ‘लोगो’ भी चस्पां किया जाता है ताकि उसकी वैधता सुनिश्चित की जा सके.

इंटरनेट पर प्रसारित इस तरह की सामग्री में मुख्य रुप से कुरान की प्रतियां, ऑडियो क्लिप्स, जिहाद से संबंधित गाने, ओसामा बिन लादेन के भाषण और फ़ोटोशॉप में तैयार की गई 9/11 हमले की अलग-अलग तस्वीरें शामिल हैं.

प्रूशा का कहना है कि ज़्यादातर सामग्री पेशेवर ढंग से तैयार की गई लगती है.

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