मोदी ने मुसलमानों को सबक़ सिखाने की बात कही: पुलिस अधिकारी भट्ट

गुजरात दंगों से संबंधित आरोपों के कारण नरेंद्र मोदी का अमरीका जाने का वीज़ा 2005 में रद्द किया गया था

गुजरात के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने शपथपत्र में वर्ष 2002 के गुजरात दंगों की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

उन्होंने इन आरोपों को दोहराया है कि 2002 में गुजरात में हुए मुस्लिम विरोधी दंगों के दौरान 'मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस अफ़सरों को दंगाइयों को नज़रअंदाज़ करने का आदेश दिया था और कहा था कि हिंदुओं को अपनी भड़ास निकालने देने दें.'

कौन हैं पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट?

संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथपत्र में कहा है कि 27 फ़रवरी 2002 को वो एक बैठक में शामिल थे जिसमें मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद पुलिस अफ़सरों से कहा था कि दंगाइयों को नज़रअंदाज़ करें. साथ ही दंगों का शिकार हो रहे लोगों की ओर से मिलने वाली शिकायतों को भी नज़रअंदाज़ करने का आदेश दिया गया था.

उधर गुजरात सरकार के प्रवक्ता जय नारायण व्यास ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भट्ट की बातों की सच्चाई सुप्रीम कोर्ट के सामने साफ़ हो जाएगी.

बीबीसी से बातचीत में जय नारायण व्यास ने कहा कि ये हलफनामा दायर होने से मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर व्यक्तिगत तौर से कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, "ये संजीव भट्ट के आरोप हैं, और आरोप-प्रत्यारोप से न्याय नहीं चलता. तथ्यों और न्यायिक प्रावधानों के आधार पर सत्य सामने आएगा."

गुजरात दंगों से संबंधित घटनाक्रम पर प्रतिक्रियाएँ

दूसरी ओर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीश तिवारी ने उम्मीद जताई कि इस हलफ़नामे पर सुप्रीम कोर्ट उचित कार्रवाई करेगा. साथ ही किसी व्यक्ति विशेष का नाम ना लेते हुए मनीश तिवारी ने कहा, "मुझे लगता है कि जो लोग गुजरात के मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हैं, वो इस हलफनामे को पढ़ने का समय ज़रूर निकालेंगे."

'ताकि ऐसा कभी दोबारा न हो'

संजीव भट्ट ने शपथपत्र में कहा है कि पुलिस अधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 'हालात ऐसे हैं कि मुसलमानों को सबक़ सिखाया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएँ (गोधरा कांड) कभी दोहराई न जा सकें.'

सन 2002 में हुए दंगों के वक़्त संजीव भट्ट ख़ुफ़िया पुलिस में तैनात थे.

उन्होंने शपथपत्र में लिखा है, "उन्होंने बैठक में मौजूद सभी से कहा कि बहुत देर तक गुजरात पुलिस सांप्रदायिक दंगों में हिदुओं और मुसलमानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में संतुलन बनाकर चलती रही है और अब समय का तकाज़ा है कि मुसलमानों को सबक़ सिखाया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएँ (गोधरा कांड) कभी दोहराई न जा सकें. मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये विचार भी ज़ाहिर किए कि हिंदुओं की भावनाएँ भड़की हुई हैं और उन्हें ग़ुस्सा निकालने का मौक़ा दिया जाना ज़रूरी है."

संजीव भट्ट ने गुजरात दंगों की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम के सामने कई बार पेश होकर अपने बयान दर्ज करवाए हैं.

इन बयानों का निचोड़ ये है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दंगा पीड़ित लोगों के बचाव के लिए कोई कार्रवाई नहीं की और न ही दंगाइयों को रोकने के लिए प्रशासनिक क़दम उठाए.

'बयानों की गोपनीयता नहीं, परिवार को ख़तरा'

शपथपत्र में उन्होंने कहा है कि विशेष जाँच टीम के सामने दिए गए उनके बयानों की गोपनीयता बनी नहीं रह सकी है.

संजीव भट्ट ने कहा है, "विशेष जाँच टीम के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत भी गुजरात सरकार के उच्च स्तरीय लोगों तक पहुँच गई थी."

उन्होंने कहा है, "इससे ऐसा लगता है कि विशेष जाँच टीम गुजरात में जारी दबाओ-छिपाओ अभियान का हिस्सा बन चुकी है."

संजीव भट्ट ने कहा है कि उनके बयान प्रेस में लीक किए जाने के बाद उन्हें अपने और अपने परिवार वालों के लिए ख़तरा होने लगा.

उन्होंने राज्य सरकार से सुरक्षा की माँग की लेकिन “दुर्भाग्यवश गुजरात सरकार ने मेरी अर्ज़ियों पर कोई ध्यान नहीं दिया.”

“यही नहीं कई बार मेरी बची खुची मामूली सुरक्षा व्यवस्था को भी वापिस लिया गया है.”

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