जब पोप ने कहा मैं जवाब नहीं जानता..

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पोप बेनेडिक्ट ने इटली के टेलीविज़न पर एक सवाल-जवाब कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. ये पहली दफ़ा है जब कोई भी पोप इस तरह के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं.

दुनिया भर से कई लोगों ने पोप से अपने सवाल पूछे- जापान के भूकंप से लेकर ईसाइयों पर होने वाले अत्याचार का मुद्दा इसमें शामिल था.

कुछ आलोचकों का कहना है कि ये पोप की छवि सुधारने की कोशिश है जबकि वेटिकन के मुताबिक इस कार्यक्रम का मकसद पोप को ज़्यादा पारदर्शी बनाना है.

ये कार्यक्रम देखने में तो किसी सामान्य टीवी परिचर्चा की तरह दिख रहा था जिसमें संगीत, दर्शक और प्रस्तुतकर्ता थे लेकिन सवालों का जवाब देने वाले कोई राजनेता नहीं बल्कि पोप थे.

पहला सवाल सात साल की एक बच्ची ने जापान से पूछा. वो जानना चाहती थी कि हाल में आए भूकंप में बच्चों को इतना कुछ क्यों भुगतना पड़ा.

वेटिकन में अपने कमरे में बैठे पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि उनके पास कोई जवाब तो नहीं है लेकिन ईसा मसीह को भी तकलीफ़ सहनी पड़ी थी.

'मुश्किल सवाल नहीं लिए'

इसके बाद सवाल पूछा एक महिला ने जो अपने बच्चे के साथ बैठी थी. बच्चा निष्क्रय अवस्था में था. माँ जानना चाहती थी कि उसके बेटे में अब भी रूह बसती है या नहीं. पोप ने इसका काफ़ी लंबा जवाब दिया और उनके पास कोई लिखित जवाब नहीं था.

हालांकि ये समझा जा रहा है कि पोप ने कार्यक्रम से पहले सारे सवाल पढ़ लिए थे. पोप ने महिला को जबाव दिया कि उनके बेटे की रूह अब भी उसके शरीर में है. इसके अलावा लोगों ने ईसाइयों के ख़िलाफ़ अत्याचार और पुर्नजीवन पर सवाल पूछे.

आलोचकों ने कहा है कि पोप ने विवादित और कठिन सवाल नहीं लिए जैसे पादरियों द्वारा दुराचार के मामले.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस कार्यक्रम का मकसद टीवी की मदद से ये दिखाना था कि पोप तक लोगों की ज़्यादा पहुँच है और उनके दरवाज़े लोगों के लिए खुले हैं. संवाददाता के अनुसार हाल में पादरियों को लेकर हुए स्केंडल को देखते हुए ये टीवी कार्यक्रम पारदर्शिता की दिशा में शुरुआत भर है.

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