पश्चिम बंगाल:दूसरे चरण में 83 फ़ीसदी मतदान

  • 23 अप्रैल 2011
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शानिवार को शांतिपूर्वक संपन्न हो गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक़ दूसरे चरण के लिए भारी मतदान हुआ है.

बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली का कहना है कि चुनाव आयोग से अब तक मिली सूचना के अनुसार 83 फ़ीसदी मतदान हुए हैं.

उनके अनुसार कई मतदान केंद्रों पर समय समाप्त हो जाने के बाद भी लोगों की लंबी क़तारें मौजूद थीं.

अमिताभ ने बताया कि कहीं से हिंसा की कोई ख़बर नहीं है केवल मुर्शिदाबाद और नदिया में छूटपूट हिंसा की ख़बरें है.

दूसरे चरण में राज्य की कुल 294 सीटों में से 50 सीटों पर मतदान हुए.

तीन ज़िलों की इन 50 सीटों के लिए 93.33 लाख मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया.

मतदाताओं ने बहुत तेज़ी से मतदान किया और दोपहर दो बजे तक बीरभूम ज़िले में सबसे अधिक 54 फ़ीसदी, नदिया में 53 फ़ीसदी और मुर्शीदाबाद में 52 फ़ीसदी मतदान हो गए थे.

पहले चरण में 54 सीटों के लिए मतदान हुआ था. पहले चरण में 70 प्रतिशत से भी अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

पश्चिम बंगाल में मुक़ाबला 1977 से सत्तारूढ़ वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन के बीच है.

धन और विकास की कमी है मुद्दा

वैसे भाजपा ने भी लगभग सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.

बीबीसी संवाददाताका कहना है कि विकास की कमी और धन बल का प्रयोग मुख्य चुनावी मुद्दा बना हुआ है.

कड़ी सुरक्षा

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Image caption तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन 34 वर्ष पुरानी वाम सरकार को बदलने का नारा लगा रहा है

जिन तीन ज़िलों में शनिवार को चुनाव हुआ उनमें मुर्शिदाबाद में 22, बीरभूम में 11 और नदिया ज़िले में 17 सीटों पर वोट डाले गए.

इन 50 सीटों के लिए 293 उम्मीदवार मैदान में हैं.

निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं. राज्य पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों के दस्तों को सुरक्षा इंतज़ाम में लगाया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों ज़िलों में पुलिस और केंद्रीय बल मिलाकर 4800 जवानों को तैनात किया गया है.

राज्य में वाममोर्चा के कार्यकर्ताओं और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें होती रही हैं और इसके अलावा राज्य के बड़े इलाक़े में माओवादी भी सक्रिय रहे हैं.

राजनीति

इस चरण के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य और सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया है.

कांग्रेस की ओर से यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा वित्तमंत्री और मुर्शीदाबाद के सांसद प्रणब मुखर्जी ने प्रचार सभाएँ कीं तो तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बैनर्जी ने प्रचार किया.

भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रचार किया.

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Image caption वाममोर्चा को पिछले लोकसभा चुनाव में क़रारी हार का सामना करना पड़ा था

इस चरण में जिन महत्वपूर्ण व्यक्तियों के राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला होना है उनमें प्रणब मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी, राज्य के पंचायत मंत्री अनिसुर रहमान, हाईकोर्ट के पूर्व जज नूर आलम चौधरी प्रमुख है.

इनके अलावा एक उद्योगपति की बेटी से शादी के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए ग्राफ़िक डिज़ाइनर रिज़वानुर रहमान के भाई रुकबानुर रहमान को तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारा है.

इन 50 में से सीपीएम ने 31 में अपने उम्मीदवार उतारे हैं तो तृणमूल कांग्रेस ने 29, कांग्रेस ने 21, भाजपा ने सभी 50 पर तो बहुजन समाज पार्टी ने 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

वर्ष 2006 के विधान सभा चुनावों में इन 50 चुनावी क्षेत्रों में से करीब 60% सीटों पर सत्ताधारी वामदलों की जीत हुई थी.

जबकि इनमें से तृणमूल और कांग्रेस पार्टी की झोली में महज़ नौ सीटें ही आईं थी. उस समय तृणमूल और कांग्रेस पार्टी के बीच वोट इसलिए भी बँट गए थे क्योंकि इनमे कोई चुनावी गठबंधन नहीं था.

हालांकि जब वर्ष 2009 के लोक सभा चुनावों के दौरान तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन एकसाथ मैदान में उतरा तो उन्हें इन क्षेत्रों में क़रीब 50 प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल हुई.

चुनाव का तीसरा चरण 27 अप्रैल को होगा और इस चरण में 75 सीटों पर मतदान होगा.

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