इतिहास के पन्नों से

अप्रैल 25 का दिन इतिहास के पन्नों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं समेटे हुए है.

वैज्ञानिकों ने जीवन का रहस्य खोजा

पच्चीस अप्रैल 1953 को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों ने जीव विज्ञान की उस बुनियादी पहेली का जवाब दिया कि कैसे जीव अपना वंश आगे बढ़ाते हैं?

'नेचर' पत्रिका में छपे एक लेख में जेम्स डी वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने डीएनए की संरचना की व्याख्या की.

डीएनए ही वो कारक है , जिससे माता-पिता के वंशानुगत लक्षण उनकी संतानों में आते हैं.

बाद में जेम्स डी वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक को उनकी इस खोज के लिए 1962 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

वॉटसन और क्रिक द्वारा बनाया गया डीएनए का मॉडल लंदन के साइंस म्यूज़ियम में रखा गया गया है.

बंधकों को छुड़ाने का प्रयास विफल

पच्चीस अप्रैल 1980 को आज ही के दिन अमरीकी सेना का तेहरान में अमरीकी दूतावास में बंघकों को छुड़ाने का प्रयास विफल हुआ.

ये एक अति गोपनीय अभियान था जिसके दौरान आठ अमरीकी सैनिक मारे गये थे.

तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होनें ही इस अभियान का आदेश दिया था ताकि अमरीकियों की जान और राष्ट्र हितों का बचाव किया जा सके.

दुर्घटना के बाद उन्होनें इस अभियान को रद्द करने की घोषणा की.

दरअसल 53 अमरीकी नागरिकों को ईरानी क्रांतिकारियों ने अमरीकी दूतावास में बंधक बना लिया था. ये क्रांतिकारी अयातुल्ला खु़मैनी के समर्थक थे.

ये संकट 444 दिन तक चला और बेहद कठिन प्रयासों के बाद जनवरी 1981 में इन बंधकों को छुड़ाया जा सका.

हिटलर की विवादास्पद डायरी की पहली किस्त छपी

पच्चीस अप्रैल 1983 के दिन जर्मन पत्रिका 'स्टर्न' ने हिटलर की विवादास्पद डायरी की पहली किस्त छापी.

कथित रूप से ये डायरियां हिटलर ने दूसरे विश्वयुद्घ के दौरान लिखी थीं.

डायरी को लेकर उस समय हंगामा हो गया जब इतिहासकार लार्ड डेकेर ने इस पत्रिका की ओर से बुलाए गये संवाददाता सम्मेलन में ये कह दिया कि अब वो इस डायरी की प्रमाणिकता पर दोबारा विचार कर रहे हैं.

चंद रोज़ पहले ही उन्होनें इन डायरियों को सही ठहराया था.

कुछ दिनों बाद रसायन विशेषज्ञ डॉ जूलियस ग्रांट ने साबित किया कि ये डायरियां हिटलर ने नही लिखी हैं क्योंकि उसमें इस्तेमाल की गई स्याही और कागज़ उस दौर की नही थे.

संबंधित समाचार