कौन होगा सत्य साईंबाबा का वारिस?

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सत्य साईंबाबा को भारत का सब से प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु माना जाता था.

उनके देहांत के बाद सवाल पूछा जाने लगा है कि इतने बड़े संगठन और इतनी सारी संपत्ति को सँभालने के लिए बाबा का वारिस कौन होगा?

उन की जगह कौन इस ट्रस्ट को चलाएगा? यह संपत्ति किसे मिलेगी?

साईंबाबा की प्रेरणा से दुनिया के 125 से ज़्यादा देशों में कई संगठन शुरू किए गए और उनके भक्तों की संख्या चार करोड़ के आस पास आँकी गई है.

कई देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कई बड़े अफ़सर, उद्योगपति, फ़िल्मी सितारे और खिलाड़ी उनके चेले हैं.

अकूत संपदा

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Image caption दुनिया भर में साईबाबा के चार करोड़ भक्त हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ सत्य साईंबाबा से जुड़े संगठनों की चल-अचल संपत्ति की कुल क़ीमत चालीस हज़ार करोड़ से लेकर डेढ़ लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है.

साईं बाबा को कभी धन दौलत की कोई कमी नहीं रही.

इस का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है की उन्होंने केवल अनंतपुर ज़िले के सात सौ गाँवों में पीने का पानी पहुँचाया.

इस परियोजना पर उन्होंने 300 करोड़ रुपये ख़र्च किए.

उन्होंने पुट्टपर्ति में एक अत्याधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाया जिसके लिए दो लोगों ने पिछले साल ही पाँच सौ करोड़ रुपए दान दिए थे.

वारिस कौन?

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Image caption साईंबाबा के भक्त पूरी दुनिया में फैले हैं.

बाबा के एक करीबी सहायक डॉ अनिल कुमार का कहना है की ट्रस्ट की व्यवस्था ऐसी है की किसी हेरा फेरी की कोई गुंजाईश नहीं है.

जहाँ तक वारिस का सवाल है, बाबा ने विवाह नहीं क्या था और उन की अपनी कोई औलाद नहीं है.

लेकिन विरासत को लेकर परिवार के कुछ सदस्यों और ट्रस्ट के बीच खींचतान हो सकती है.

इन में विशेषकर उन के भतीजे रत्नाकर का नाम लिया जा रहा है.

साईंबाबा ने पहले ही ये भविष्यवाणी कर दी थी कि उन का वारिस प्रेमा साईं नाम का एक व्यक्ति होगा जो कर्नाटक के मांड्या जिले के गुन्पर्ति गाँव में पैदा होगा.

और वही उन का नया अवतार होगा.

नामी गिरामी लोग

दुनिया भर में फैले संगठनों के जाल में सबसे ऊपर एक सत्य साईं केन्द्रीय ट्रस्ट है जिस के सदस्यों में भारत और विदेश के शक्तिशाली लोग शामिल हैं.

इस ट्रस्ट के अध्यक्ष साईं बाबा खुद रहे हैं और सचिव पूर्व आईएएस अधिकारी के चक्रवर्ती हैं.

उस के सदस्यों में चेन्नई के उद्योगपति और टीवीएस समूह के अध्यक्ष वी श्रीनिवास, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त एस वी गिरी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी एन भगवती आदि कई महत्वपूर्ण लोग हैं.

दिलचस्प बात यह है की बाबा ने अपने ट्रस्ट और संगठनों से अपने परिवार के सदस्यों को हमेशा दूर रखा.

केन्द्रीय ट्रस्ट में उन के भतीजे रत्नाकर हैं जिन्हें उनके पिता जानकीरम की जगह पर पिछले साल ही ट्रस्ट में लाया गया था.