दक्षिण सूडान में हुई झड़पों में 57 मरे

  • 24 अप्रैल 2011
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Image caption दक्षिण सूडान ने उत्तर से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था

दक्षिण सूडान के सरकारी बलों और विद्रोही मिलिशिया के बीच हुई लड़ाई में कम से कम 57 लोग मारे गए हैं.

दक्षिण सूडान के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर मलाक अयून ने बताया कि जोंगलेइ में हुई इन झड़पों में दर्जनो घायल भी हुए हैं.

जनवरी में हुए जनमत संग्रह में दक्षिण सूडान के लोगों ने उत्तर से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था.

दक्षिण सूडान को जुलाई में औपचारिक रूप से आज़ादी मिल जाएगी और वो उत्तरी सूडान से अलग हो जाएगा.

दक्षिण सूडान के अधिकारी उत्तरी सूडान में बैठी सरकार पर आरोप लगाते हैं कि वो जानबूझ कर दक्षिण सूडान को अस्थिर करने के लिए विद्रोहियों का समर्थन कर रही है. जबकि सरकार इन आरोपों का खंडन करती है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस इलाक़े में जनवरी से अब तक 800 लोग मारे जा चुके हैं और कोई 94,000 लोग अपने घर छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं.

इस संघर्ष को देखते हुए इस नए देश के भविष्य पर चिंता होने लगी है.

विद्रोही संगठन

दक्षिण सूडान में कम से कम सात विद्रोही संगठन सक्रिय हैं.

सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर मलाक अयून का कहना है कि शनिवार को मलाकाल शहर के दक्षिण में हुई लड़ाई के लिए मेजर जनरल गेब्रियल तांग के नेतृत्व में लड़ रहे विद्रोही ज़िम्मेदार थे.

सूडान में 21 साल तक चले गृहयुद्ध के दौरान जनरल तांग ने ख़ारतूम में बैठी सरकार का समर्थन प्राप्त मिलिशिया का नेतृत्व किया था.

उनके लड़ाकों पर ये आरोप हैं कि उन्होने नील नदी के किनारे बसे दक्षिणी सूडान के गांवो को लूटा और जलाया जिसमें 20 लाख लोग मारे गए.

गृहयुद्ध तो 2005 में समाप्त हो गया लेकिन जनरल तांग के वफ़ादार बलों ने शांति समझौते का उल्लंघन करते हुए सूडान पीपल्स लिबरेशन आर्मी के ख़िलाफ़ लड़ाई की.

फिर भी दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति ने जनवरी में हुए जनमत संग्रह से पहले जनरल तांग को राजक्षमा दे दी और उनके लड़ाकों को दक्षिण सूडान की सेना में भर्ती करने पर सहमत हुए.

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