जैतापुर परमाणु संयंत्र पर राजनीति

  • 25 अप्रैल 2011
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Image caption जैतापुर परमाणु ऊर्जा योजना के विरोधी पहुंचे महाड

महाराष्ट्र की जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना के विरोधी अब डॉ भीमराव अंबेडकर की कर्मभूमि महाड पहुंच गए हैं.

रत्नागिरि से लगे रायगढ़ ज़िले के महाड शहर में पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया है.

महाड बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां डॉ अंबेडकर ने दलितों के लिए सत्याग्रह किया था.

यहां अंबेडकर की मूर्ति के सामने एक रैली का आयोजन किया गया है जहाँ आगे के कार्यक्रम पर विचार होगा.

अब तक मिली सूचना के मुताबिक कड़ी सुरक्षा के बीच मार्च में हिस्सा लेने आए कार्यकर्ताओं का एक छोटा समूह सार्वजनिक यातायात के सहारे रत्नागिरी के नाटे गांव तक पहुंचने में कामयाब रहा है. यह गांव संयंत्र के लिए प्रस्तावित जगह से नज़दीक है. ये लोग मंगलवार को जैतापुर जाएंगे.

कोंकण बचाओ समिति की प्रमुख वैशाली पाटिल के मुताबिक लगभग 100 की संख्या में बाकि बचे कार्यकर्ता वापस मुंबई लौट रहे हैं और वहां एक रैली में हिस्सा लेंगे.

इस विरोध मार्च की शुरुआत 23 अप्रैल को हुई थी. इस यात्रा के दौरान कई बार लोगों को पुलिस ने हिरासत लिया और बाद में छोड़ दिया.

मार्च में शामिल होने वालों में जस्टिस (रिटायर्ड) पीबी सावंत और ऐडमिरल (रिटायर्ड) रामदास प्रमुख हैं.

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Image caption साकरी नाटे गांव में पुलिस की गोलीबारी में मारे गए तबरेज़ के पिता अब्दुल सत्तार

ठाकरे पहुंचे तबरेज़ के घर

शिवसेना के कार्यकारी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पुलिस की गोली से मारे गए तबरेज़ के घर वालों और घायलों के परिवार जनों से मुलाक़ात की.

पिछले सोमवार को साकरी नाटे गाँव में पुलिस की गोलीबारी के दौरान तबरेज़ की मौत हो गई थी.

गाँव साकरी नाटे प्रस्तावित जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ही स्थित है.

तबरेज़ के पिता अब्दुल सत्तार ने बीबीसी को बताया कि उद्धव ठाकरे ने मामले की जाँच का आश्वासन दिया और परमाणु ऊर्जा के खिलाफ़ टिप्पणी की.

हादसे के दिन से ही तबरेज़ की पत्नी ने किसी से भी बात करना छोड़ दिया है और वो कुरान का पाठ करती रहती है.

तबरेज़ घर का अकेला कमाने वाला था. परिवार के अनुसार प्रशासन के किसी भी व्यक्ति ने किसी प्रकार की मदद की कोई बात नहीं की है.

गांव वालों की नाराज़गी रत्नागिरी के सब-डिविज़नल अधिकारी अजित पवार से है और वो उनके निलंबन की मांग कर रहे हैं.

उनका आरोप है अजित पवार के निर्देश पर ही फ़ायरिंग हुई थी.

ठाकरे ने यू-टर्न किया

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो परमाणु ऊर्जा संयंत्र के ख़िलाफ़ हैं.

उन्होने कहा, "शिवसेना और गाँव वालों में कोई फ़र्क नहीं है और हम प्रकल्प के विरोधी हैं क्योंकि आपने जापान में क्या हुआ वो देखा है. चेर्नोबिल की घटना को 25 साल होने जा रहे हैं".

"ये जो प्रोजैक्ट आने वाला था उसकी भीषण विनाशकारी शक्ति थी. अपने देश में जहां भी ये प्रकल्प आ रहे हैं उनका विरोध हो रहा है चाहे वो गुजरात हो या फिर पश्चिम बंगाल. हम एक होकर इस न्यूक्लियर बम का विरोध करेंगे".

उद्धव ने इन आरोपों से इंकार किया कि शिवसेना राजनीति कर रही है.

इस सवाल पर कि शिवसेना ने तो संसद में भारत-अमरीका परमाणु समझौते का समर्थन किया था तो वो जैतापुर संयंत्र का विरोध क्यों कर रहे हैं उद्धव ने जैसे यू-टर्न लेते हुए कहा, ‘हमने तो समझौते का विरोध किया था. हमारा विरोध आज भी कायम है. ज़मीन पर एक भूमिका और संसद में एक भूमिका ये दोहरी नीति शिवसेना की नहीं है.’

उधर पार्टी के एक नेता ने बताया कि शुरु में पार्टी के लिए ये फ़ैसला करना मुश्किल हो गया था कि वो जैतापुर का विरोध करे क्योंकि वह संसद में बिल का समर्थन कर चुकी थी.

लेकिन जापान में हुई घटना के बाद दुनिया में कई जगह अणु ऊर्जा पर दोबारा विचार हो रहा है.

चलते चलते उद्धव ठाकरे ने नारायण राणे को ‘फ़ालतू आदमी’ भी बता डाला और राणे के आरोपों पर क़ानूनी कार्रवाई करने की बात की.

राणे ने विधानसभा में कहा था कि 11 कंपनियों ने शिवसेना को 500 करोड़ रुपए लेकर जैतापुर संयंत्र का विरोध करने के लिए कथित तौर पर संपर्क किया है.

हालांकि प्रशासन ने आज राहत की सांस ज़रूर ली होगी कि आज का दिन बिना किसी घटना के गुज़र गया, लेकिन संयंत्र के भविष्य को लेकर कई सवाल बाकी हैं.

उधर कांग्रेस नेता विश्वास व्यक्त कर रहे हैं कि वो लोगों को समझा-बुझाकर उन्हे संयंत्र के पक्ष में कर लेंगे.

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