सीरिया में बल प्रयोग, अमरीका नाराज़

  • 26 अप्रैल 2011
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Image caption सीरिया की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ टैकों से हमला किया

सीरिया में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सेना और टैंकों के इस्तेमाल के बाद अमरीका ने कहा है कि वो सीरिया सरकार के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है.

अमरीका का कहना है कि सीरिया की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ क्रूर हिंसा की है और इसी कारण प्रतिबंधों पर विचार हो रहा है.

अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा सीरिया के ख़िलाफ़ कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि सीरिया को संदेश दिया जाए कि उनका रवैया स्वीकार्य नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र में मौजूद यूरोपीय कूटनीतिज्ञों का कहना है कि वो एक ऐसे बयान का मसौदा बांट रहे हैं जिसमें सीरिया में हिंसा की आलोचना की गई है पिछले हफ्तों में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की मौतों की जांच की अपील की गई है.

सोमवार को सीरिया के डेरा शहर में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सेना और टैंक भेजे गए थे.

रिपोर्टों के अनुसार डेरा शहर के बीचोबीच लड़ाई हुई है और सड़कों पर लाशें बिखरी पड़ी हैं.

एक कार्यकर्ता के अनुसार सैनिकों ने अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार राजधानी दमिश्क में भी गोलीबारी हुई है.

एक जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता का कहना है कि राष्ट्रपति बशर अल असद ने लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दिया है.

सीरिया के कई शहरों में पिछले कई हफ्तों से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन डेरा इन प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बना हुआ है.

कार्यकर्ताओं के अनुसार डेरा में सोमवार को कम से कम पाँच हज़ार सैनिक और सात टी-55 टैंकों ने हमला किया.

अपुष्ट सूत्रों के अनुसार टैंकों ने पुराने शहर के पास ओमारी मस्जिद को घेर लिया और आस पास की इमारतों पर बंदूकधारी भी तैनात कर दिए थे.

विपक्ष दल का कहना है कि गोलीबारी में 25 लोग मारे गए हैं. लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

सीरिया की सेना में भी फूट पड़ने की खबरें आ रही हैं लेकिन देश के भीतर असल में क्या हो रहा है इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है क्योंकि विदेशी पत्रकारों को सीरिया में घुसने की अनुमति नहीं दी गई है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै ने सीरियाई सरकार के क़दम की निंदा की है.

नवी पिल्लै का कहना था कि हिंसा की बढ़ती घटना से लगता है कि या तो सरकार राजनीतिक सुधारों के प्रति गंभीर नहीं है या फिर सुरक्षा बल उनके नियंत्रण में नहीं हैं.

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