यमन में प्रदर्शनकारियों ने बनाया दबाव

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Image caption सना में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं और सालेह को तुरंत हटाने की मांग कर रहे हैं.

यमन में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के पद छोड़ने संबंधी समझौते के बाद भी बड़ी संख्या में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी धरने पर हैं.

प्रदर्शनकारियों ने राजधानी सना में एक स्थायी कैंप बना लिया है और उनका कहना है कि उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं है कि राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह पद छोड़ने के अपने वादे पर कायम रहेंगे.

राष्ट्रपति सालेह ने शनिवार को कहा था कि वो अगले 30 दिनों में पद छोड़ देंगे और कार्यभार उपराष्ट्रपति को सौंप देंगे. खाड़ी देशों ने इस संबंध में एक योजना तैयार की थी जिसे राष्ट्रपति सालेह ने मान लिया था.

हालांकि प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राष्ट्रपति तुरंत पद छोड़ दें.

सना और देश के कई अन्य हिस्सों में रविवार को फिर से प्रदर्शन हुए हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सना में प्रदर्शनकारियों के चारों तरफ सेना की इन इकाईयों के जवानों ने सुरक्षा घेरा बना लिया है जिन्होंने सेना से विद्रोह कर दिया है.

सना में कई वर्दीधार सैनिक प्रदर्शनकारियों के साथ नारे लगाते देखे गए हैं.

प्रदर्शनकारियों की चिंता के बावजूद सात विपक्षी दलों के गठबंधन ने गल्फ कोआपरेशन काउंसिल की मदद से बनाई गई एक योजना को मान लिया है.

इस योजना के तहत सालेह, उनके परिवार और सहयोगियों पर कोई मुकदमा नहीं चलेगा और वो सत्ता उपराष्ट्रपति को सौंप देंगे. इसके बाद उपराष्ट्रपति राष्ट्रीय एका सरकार बनाएंगे जिसका काम दो महीने में राष्ट्रपति चुनाव करवाना होगा.

सालेह का इंटरव्यू

Image caption सालेह का कहना है कि वो संवैधानिक तरीके से सत्ता छोड़ेंगे

राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में कहा है कि वो संवैधानिक तरीके से ही सत्ता छोड़ेंगे और सत्ता एकबारगी प्रदर्शनकारियों के हाथों में नहीं सौंपी जा सकती है.

सालेह ने अपने ख़िलाफ़ कई हफ्तों से चले आ रहे प्रदर्शनों को तख्तापलट क़रार दिया.

सालेह की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वो इस शर्त पर सत्ता छोड़ने को राज़ी हुए हैं कि उनके ख़िलाफ़ न कोई मामला बनाया जाएगा और न ही कोई कार्रवाई की जाएगी.

पिछले दो महीने से यमन में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं जिसमें 130 लोग मारे जा चुके हैं.

राष्ट्रपति सालेह ने बीबीसी से कहा कि प्रदर्शनों के जारी रहने से देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है.

उन्होंने कहा, ‘‘ अमरीका और यूरोप में बैठ कर मेरे इस्तीफ़े की मांग हो रही है. मैं किसे सत्ता सौंप दूं जो तख्तापलट की कोशिश में हैं उन्हें. नहीं ऐसा नहीं करुंगा मैं. हम बैलेट बॉक्स और जनमत संग्रह के ज़रिए सत्ता परिवर्तन करेंगे. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को बुलाया जाएगा.’’

उनका कहना था कि वो संवैधानिक वैधता के पक्षधर हैं और किसी भी तरह के तख्तापलट को खारिज करते हैं और अराजक स्थिति पैदा नहीं होने देंगे.

सालेह ने अल क़ायदा का भी राग छेड़ा और कहा कि प्रदर्शनकारियों में अल क़ायदा के तत्व भी शामिल हैं.

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