कैसे भागे थे बिन लादेन

  • 27 अप्रैल 2011
Image caption नए दस्तावेज ओसामा के तोरा बोरा से निकलने की अलग ही कहानी बताते हैं.

ब्रितानी समाचार पत्र ‘गार्डियन’ में प्रकाशित अमरीका के ख़ुफ़िया दस्तावेज़ों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर पश्चिमी पहाड़ी इलाक़े तोराबोरा में अमरीकी और ब्रितानी सेना के कड़े सुरक्षा कवच को देखते हुए अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन भागने में सफल हो गए थे.

अफ़ग़ानिस्तान से ओसामा बिन लादेन के फ़रार होने की कई जानकारियाँ मिलती हैं लेकिन स्पष्ट रुप से अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है.

दुनिया के ‘मोस्ट वॉंटेड मेन’ ओसामा बिन लादेन के तोराबोरा के पहाड़ों से भागने के बारे में कई नई जानकारी अमरीकी जेल ग्वांतानामो बे के क़ैदियों पर आधारित जाँच के दस्तावेज़ों से सामने आई है.

वर्ष 2007 में ग्वांतानामो बे के एक क़ैदी हारून शहरज़ादा अफ़ग़ानी से मिली जानकारी के मुताबिक़ ओसामा बिन लादेन अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अतंरराष्ट्रीय सेना के सुरक्षा कवच से तंग आकर एक पाकिस्तानी क़बायली नेता मौलवी नूर मोहम्मद की मदद से अपने सुरक्षित ठिकाने से भागने में कामयाब हो गए थे.

अख़बार लिखता है कि इस दस्तावेज़ में मौलवी नूर मोहम्मद में बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई है लेकिन ख़बरें हैं कि यह वही मौलवी नूर मोहम्मद है जिन्हें वर्ष 2010 में उत्तर वज़ीरिस्तान के इलाक़े मीरानशाह में गोली मार दी गई थी.

दस्तावेज़ के मुताबिक़ मौलवी नूर मोहम्मद ने अल-क़ायदा के एक वरिष्ठ कमांडर अबू तुराब से मुलाक़ात कर 40 से 50 चरमपंथी दिए थे जिन्होंने कड़ी सुरक्षा के बीच ओसामा बिन लादेन और अयमन ज़वाहिरी को सुरक्षित स्थान पहुँचा दिया था.

इन दस्तावेज़ों को प्रकाशित होने से पहले यह कहा जाता था कि ओसामा बिन लादेन तोराबोरा से दक्षिण ओर फ़रार हुए और सीमा पर पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी में वहाँ से कहीं ग़ायब हो गए.

ग्वांतानामो बे के दो क़ैदियों के बयानों और अमरीकी अधिकारियों के ख़ुफ़िया दस्तावेज़ों के अनुसार ओसामा बिन लादेन उन इलाक़ों से नकली भेष बनाकर जलालाबाद गए जिन इलाक़ों में अतंरराष्ट्रीय सेना तैनात थी और उसके बाद वे कंटर प्रांत चले गए जहाँ वे दस महीने रहे.

पैसा उधार लिया था

इन दस्तावेज़ों से यह भी पता चलता है कि ओसामा बिन लादेन ने तोराबोरा से फ़रार होते समय अपने एक दोस्त से सात हज़ार डॉलर उधार लिए थे.

ग्वांतानामो बे के क़ैदी हारून शहरज़ादा ने बताया कि वर्ष 2002 के अंत में ओसामा बिन लादेन ने अब्दुल हादी अलईराक़ी को बुला कर उनसे लिए हुए सात हज़ार डॉलर वापस कर दिए थे.

अमरीकी दस्तावेज़ों में यह भी बताया गया है कि 11 सितंबर 2001 को ओसामा कहाँ थे. एक दस्तावेज़ में कहा गया है कि 11 सितंबर 2001 को ओसामा बिन लादेन अफ़ग़ानिस्तान के शहर ख़ोस्त में थे.

एक ओर दस्तावेज़ में कहा गया है कि अक्तूबर 2001 में ओसामा बिन लादेन काबुल के करीब एक गेस्ट हाऊस में मौजूद थे.

13 अक्तूबर 2001 को जब अमरीका काबुल पर कब्ज़ा होने वाला था तो उस समय ओसामा ने एक बैठक की अध्यक्षता की थी जिस में उन्होंने अरब चरमपंथियों को पश्चिम की ओर जाने की सलाह दी थी.

तीन अक्तूबर 2001 को ओसामा बिन लादेन जलालाबाद पहुँचे थे जहाँ उन्होंने स्थानीय चरमपंथियों के समर्थन को सुनिश्चित करने के लिए एक लाख डॉलर बाँटे थे.

अख़बार लिखता है कि जलालाबाद से वे तोराबोरा की गुफाओं में बनाए गए अपने सुरक्षित ठिकाने में पहुँचे थे जो उन्होंने सोवियत संघ के हमले के दौरान बनाया था.

दस्तावेज़ों के अनुसार ग्वांतानामो बे के कुछ क़ैदियों ने तोराबोरा के पहाड़ों में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी पर संदेह व्यक्त किया था.

अख़बार लिखता है कि ओसामा बिन लादेन और अयमन अल-ज़वाहिरी के बारे में अब कुछ पता नहीं है कि वे दोनों कहाँ हैं.

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