यमन के राष्ट्रपति सत्ता छोड़ेंगे

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Image caption यमन में विरोध प्रदर्शन

यमन के विपक्षी दलों ने खाड़ी सहयोग देशों की उस पहल को स्वीकार कर लिया है जिसके तहत राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह अगले 30 दिनों के अंदर अपने मातहत को सत्ता सौंप देंगे.

पिछले कुछ महीनों से यमन में राष्ट्रपति शासन के ख़िलाफ़ राजनीतिक विद्रोह चल रहा है.

लेकिन विपक्षी दलों की तरफ़ से इस ऐलान का मतलब यह कतई नहीं है कि संकट हर हालत में समाप्त हो जाएगा और प्रदर्शन रुक जाएंगे.

वैसे विपक्षी दलों की इस स्वीकृति को वर्तमान राजनीतिक संकट को हल करने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

राजनीतिक दलों के गठबंधन ने कहा है कि पहले इसका विरोध करने के बावजूद अब वह राष्ट्रपति सालेह के दल के साथ सहयोगी सरकार बनाने के लिए तैयार हैं. खाड़ी देशों की इस योजना के तहत इसके बाद वहाँ राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराए जा सकते हैं.

लेकिन यह विपक्षी दल यमन में सड़कों पर उतर आए सैकड़ों हज़ारों युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते. इनमें से कईयों ने उस समझौते के किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है जिसके तहत राष्ट्रपति सालेह थोड़े समय के लिए भी सत्ता में रह सकते हैं.

हाल के दिनों में प्रदर्शन लगातार जारी रहे हैं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह अपने विद्रोह की तीव्रता को और बढ़ाएंगे.

वह उस प्रस्ताव को भी अस्वीकार करते है जिसके तहत राष्ट्रपति को मुकदमा चलाने से छूट मिल जाए.

पहले राष्ट्रपति सालेह कह चुके हैं कि वह सत्ता हस्ताँतरण के प्रस्ताव को तभी स्वीकार करेंगे जब सारे प्रदर्शन रुक जाएं. यमन में हालात सामान्य करने के लिए यह ज़रूरी है कि इन युवा कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिया जाए.

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